तस्वीर में: प्रतिमा सिंह, आकांक्षा सिंह, दिव्या सिंह और प्रशांति सिंह (बाएं से दाएं)।
वाराणसी. दक्षिण कोरिया के इंचियोन शहर में 17वें एशियन गेम्स का आगाज हो चुका है। वाराणसी की तीन सगी बहनें भी इसमें हिस्सा ले रही हैं। वह भारतीय बास्केटबॉल टीम की ओर से अपना जलवा बिखेरेंगी। इनमें दो बहनें, आकांक्षा सिंह और प्रशांति सिंह मैदान में उतरेंगी। वहीं, उनकी बड़ी बहन दिव्या सिंह बतौर कोच उनका हौसला बढ़ाएंगी।
इस मौके पर dainikbhaskar.com की टीम ने उनके माता-पिता से बात की। हमने इस दौरान उनकी बेटियों की कामयाबी का राज जानने की कोशिश की। जौनपुर जफराबाद के रहने वाले उनके पिता गौरी शंकर काशी के शिवपुर में रहते हैं। वे रिटायर्ड बैंक कर्मी हैं। उनकी मां उर्मिला सिंह गृहिणी हैं।
क्या कहते हैं पिता
दिव्या सिंह, प्रशांति सिंह और आकांक्षा सिंह के पिता गौरी शंकर सिंह ने बताया कि उनकी पांच बेटियां हैं, जिनमें से चार भारतीय टीम का हिस्सा रही हैं। दक्षिण कोरिया में शुरु हुए 17वें एशियन गेम्स में उनकी तीन बेटियां दिव्या सिंह, प्रशांति सिंह और आकांक्षा सिंह भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया दिव्या शानदार मूव बनाने में माहिर हैं। प्रशांति इस समय एशिया की बेस्ट फॉरवर्ड खिलाड़ियों में से एक हैं। वहीं, आकांक्षा बेस्ट मिड फील्डर हैं। गौरी शंकर सिंह ने बताया कि बेटियों ने उनका मान बढ़ाया है। आज वे राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं।
यूपी और केंद्र सरकार नहीं देती ध्यान
गौरी शंकर सिंह ने बताया कि दिव्या भारतीय टीम की कप्तान रही है। देश और प्रदेश को उसने अपनी कप्तानी में कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडल दिलवाया। राज्य और केंद्र सरकार को द्रोणाचार्य, यश भारती सम्मान और राजीव गांधी खेल रत्न सम्मान के लिए लिखा गया, लेकिन वे ध्यान नहीं देती। प्रशांति सिंह को अर्जुन अवॉर्ड देने के लिए सरकार के पास पूरा फाइल भेजा। इसपर भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
आगे पढ़िए पिता ने कहा- दूसरे देशों की तरह मिले मौका...