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ट्रेन में दुष्कर्मियों से लड़ते खोया पैर, शरीर के हर हिस्से में टांके, होश आते बोली- उन्हें मार डालूंगी

5 वर्ष पहले
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वाराणसी. बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में एक महिला बेसुध पड़ी है। दर्द के इंजेक्शन के सहारे जिंदा है, लेकिन इंजेक्शन का असर कम होते ही कराहने लगती है। फिर अचानक गुस्से से भर उठती है और अपने एक पैर के सहारे अस्पताल के बिस्तर से भागने की कोशिश करती है। चिल्लाती है और कहती है, "मैं ठीक हो जाऊं तो उन दोनों आदमियों को मार डालूंगी। बस एक बार वो दोनों मेरे सामने आ जाएं।" कौन है ये महिला और क्या हुआ इसके साथ...

- ये उस महिला की कहानी है जिसे उत्तर प्रदेश में पिछले महीने रेपिस्टों ने चलती ट्रेन से फेंक दिया था।
- बात 18 सितंबर की है। रात को महिला मायके से उत्तर प्रदेश के जौनपुर अपनी ससुराल लौट रही थी। गलती से मऊ चली गई। ट्रेन में वो आखिरी डिब्बे में थी। तब ट्रेन लगभग खाली हो गई थी।
- तीन आदमी जो शायद उस ट्रेन में मूंगफली और चाट बेचते थे, उसके पास आए और उसे दबोच लिया।
- इसके बाद वो चिल्लाने लगी और भागकर ट्रेन के गेट तक आ गई तो उन लोगों ने इसे चलती ट्रेन से पटरियों पर फेंक दिया। उसका पैर ट्रेन के नीचे आ गया।
- वो पटरियों से कुछ मीटर दूर खेत में काम कर रहे मजदूरों को पड़ी मिली। कोई नहीं जानता कि यहां तक वह कैसे पहुंची होगी।
- होश आता है तो चिल्लाती है या बुदबुदाकर कुछ बातें कहने लगती है। लोगों ने देखा तो उसे अस्पताल पहुंचाया।
- मऊ के अस्पताल में जब उसकी हालत बिगड़ने लगी तो उसे वाराणसी के बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट कर दिया।
किसी को मिलने की इजाजत नहीं
- हमें बीएचयू अस्पताल के बाहर उसका पति मिल गया। दोपहर हो चुकी थी, लेकिन उसने तब तक खाना नहीं खाया था। पूछने पर बोला कि जितने पैसे थे, वो दो दिन पहले खत्म हो चुके हैं। वो अपने चार बच्चों की फोटो अपने छोटे से फोन में दिखाने लगा। बोला कि मैं यहां भूखा हूं तो कोई फर्क नहीं पड़ता। न जाने मेरे बच्चों को क्या हो रहा होगा।
महिला से मिलने की किसी को नहीं इजाजत
- वॉर्ड के बाहर जीआरपी के जवान दिन-रात पहरेदारी कर रहे हैं। उससे मिलने की इजाजत किसी को नहीं है। बमुश्किल छिपते-छिपाते हम कमरे के भीतर पहुंच पाए। वो बेजान-सी बेड पर पड़ी थी।
- शरीर का कोई हिस्सा ऐसा नहीं था जहां टांके न आए हों। उसका एक पैर घुटने से नीचे ऑपरेशन कर हटा दिया गया है। डॉक्टर कहते हैं कि इन्फेक्शन इतना बढ़ गया था कि जान को खतरा था। खून बह चुका था। रेलवे के अफसर और जवानों ने 5 यूनिट खून दिया, तब जाकर उसका शरीर ऑपरेशन करने लायक हो सका।
- वो बेहोशी से उठती है तो अपने चारों बच्चों को याद करती है। पति बहलाने के लिए मोबाइल पर उसे बच्चों की फोटो दिखाता है।
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