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गोविंदा के मामा वर्ल्‍ड फेमस लच्‍छू महाराज का निधन, BHU में ली अंतिम सांस

सुप्रसिद्ध तबला वादक लच्छू महराज जी का बुधवार देर रात निधन हो गया। बीएचयू में इलाज के दौरान उन्‍होंने अंतिम सांस ली।

Dainik Bhaskar

Jul 28, 2016, 12:23 PM IST
लच्‍छू महाराज के निधन के बाद प लच्‍छू महाराज के निधन के बाद प
वाराणसी. जाने-माने तबला वादक लक्ष्मण नारायण सिंह उर्फ लच्छू महाराज का बुधवार देर रात निधन हो गया। वे कई दिनों से बीमार थे। डॉक्‍टरों ने बताया, हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हुआ। 16 अक्टूबर 1944 को उनका जन्म हुआ था। वे एक्टर गोविंदा के मामा और गुरु थे। इस खबर के बाद गोविंदा अपनी शूटिंग कैंसल कर बनारस पहुंच रहे हैं। बचपन में ही गोविंदा ने लच्छू महाराज को बना लिया था गुरु...
- लच्छू महाराज के भाई आरपी सिंह व पीएन सिंह ने बताया कि एक्टर गोविंदा को तबला बजाना लच्छू महाराज ने ही सिखाया था।
- वह जब यहां आते थे साथ मिलकर ही तबला बजाया करते थे।
- लच्छू महाराज को गोविंदा ने बचपन में ही अपना गुरु मान लिया था।
- जब लच्छू महाराज मुंबई जाते तो वे गोविंदा के घर में ही रुकते थे।
गोविंदा ने कहा- मुझे बहुत दुख हुआ
- आरपी सिंह ने बताया कि जैसे ही ये खबर गोविंदा को लगी वे दुखी हो गए।
- फोन पर बताया, ''मैं सब शूटिंग कैंसल कर कल बनारस आऊंगा।''
कौन थे लच्छू महाराज?
- जाने-माने तबला वादक थे। इन्होंने बनारस घराने की तबला बजाने की परंपरा को आगे बढ़ाया।
- उनके कई शिष्य देश-दुनिया में तबला बजाते हैं।
- लच्छू महाराज बेहद सादगी पसंद शख्स थे। इसी कारण उन्होंने कोई सम्मान नहीं लिया।
- उनके अजीज मित्र राम अवतार सिंह ने बताया कि वह इतने साधारण थे कि 2002-03 में यूपी सरकार की ओर से उन्हें पद्श्री दिया जा रहा था, लेकिन उन्होंने नहीं लिया। बाद में ये सम्मान उनके शिष्य पंडित छन्नू लाल मिश्र को मिला।
- भाई पीएन सिंह ने बताया कि जब आठ साल की उम्र में वे मुंबई में एक प्रोग्राम के दौरान तबला बजा रहे थे तो जाने-माने तबला वादक अहमद जान ने कहा था कि काश लच्छू मेरा बेटा होता।
इमरजेंसी के दौरान जेल में तबला बजाकर जताया था वि‍रोध
- लच्‍छू महाराज स्‍वाभि‍मानी और अक्‍खड़ स्‍वभाव के थे।
- कभी कि‍सी के कहने पर तबला नहीं बजाया। जब दि‍ल कि‍या, तभी अंगुलि‍यां चलाईं।
- उन्‍होंने इमरजेंसी के दौरान जेल में तबला बजाकर वि‍रोध जताया था।
- उन्‍होंने पद्मश्री लेने से मना कर दि‍या था। कहते थे श्रोताओं की वाह और तालि‍यों की गड़गड़ाहट ही कलाकार का पुरस्‍कार होता है।
- वे बनारस घराने के थे, लेकि‍न खासि‍यत ये कि‍ चारों घरानों की ताल एक कर लेते। उनका गत, परन, टुकड़ा कमाल का था।
- 8 साल की उम्र में मुंबई के एक कार्यक्रम में तबला बजा रहे थे तो मशहूर तबला वादक नवाज अहमद जान थि‍रकवा ने कहा था कि‍ काश लच्‍छू मेरा बेटा होता।
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