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चंदौली: इलाज के बाद पैसे नहीं देने पर डॉक्टर ने जच्चा-बच्चा को बनाया बंधक

7 वर्ष पहले
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फोटो: पीड़िता महिला से पूछताछ करती पुलिस।
चंदौली. चंदौली जिले में एक डॉक्टर पर महिला और उसके बच्चे को अस्पताल में बंधक बनाने का आरोप लगा है। पीड़िता का कहना है कि उसे बीते चार दिनों से भूखा-प्यासा रखा गया था क्योंकि उसने मंहगे इलाज का खर्च नहीं चुका पा रही थी। डॉक्टर बिहार के सासाराम में जिला अस्पताल में तैनात है। अलीनगर थानाक्षेत्र में आरोपी डॉक्टर का प्राइवेट नर्सिंग होम है। डॉक्टर अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बता रहा है।
चंदौली जिले के अलीनगर में शाश्वत नर्सिंग होम है। यहां नर्सिंग होम डॉक्टर एके तिवारी चलाते हैं। पीड़िता रेनू ने बताया कि बीते 30 नवंबर की रात को गाजीपुर के दिलदारनगर से एक नर्सिंग होम से यहां के लिए रेफर किया गया था। रेफर करने से पहले अस्पताल में उनसे पांच हजार रुपए जमा करवाया गया। साथ ही कहा गया कि शाश्वत नर्सिंग होम में इलाज हो जाएगा। यहां एक दिसंबर की रात को ऑपरेशन से उसने बच्चे को जन्म दिया।

पीड़िता के मुताबिक, ऑपरेशन के तीन दिन बाद अस्पताल के कर्मचारियों ने उन्हें 40 हजार रुपए का बिल थमा दिया। इस पर उसने कहा कि वह पांच हजार रुपए दिलदारनगर में ही जमा करा चुकी है। इसके बाद डॉक्टर ने कहा कि वह तो एजेंट कमीशन था। उसके जरिए तुम यहां नर्सिंग होम आई हो। रुपए नहीं चुकाने के एवज में उन्हें और उसके बच्चे को अस्पताल में कैद कर दिया गया। यहां तक कि पिछले तीन दिन से खाना भी नहीं खाने दिया गया।
आगे पढ़िए, क्या कहते हैं जांच अधिकारी और आरोपी डॉक्टर...