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'माया' के मंत्रियों के खिलाफ अखिलेश सरकार सख्त

8 वर्ष पहले
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लखनऊ. यूपी की अखिलेश सरकार, पूर्ववर्ती मायावती सरकार के भ्रष्टाचार के आरोपी मंत्रियों के खिलाफ सख्त होती जा रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रमुख सचिव (विजिलेंस) को आवश्यक औपचारिकता पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अखिलेश के निर्देश के बाद तेजी आ गई है। इस बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति मामले में सतर्कता विभाग की जांच के खिलाफ पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी की याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
अदालत ने याची की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग भी स्वीकार नहीं की है। यह आदेश न्यायमूर्ति धरणीधर झा तथा न्यायमूर्ति पंकज नकवी की खंडपीठ ने त्रिपाठी की याचिका पर दिया है। मायावती सरकार के तीन पूर्व मंत्रियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने की भी प्रक्रिया शुरू हो गई है। शासन की अनुमति बहुत जल्द मिलने की उम्मीद है। सतर्कता विभाग ने पूर्व माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र और पूर्व दुग्ध विकास व पशुपालन मंत्री अवधपाल सिंह यादव के खिलाफ विवेचना पूरी कर आरोप पत्र दाखिल करने के लिए 29 अप्रैल को अनुमति मांगी, जबकि पूर्व श्रम मंत्री बादशाह सिंह के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने के लिए 25 अप्रैल को ही अपना प्रस्ताव भेजा है।
प्रमुख सचिव (सतर्कता) आरोप पत्र दाखिल करने के लिए विवेचना रिपोर्ट और मांग पत्र मिलने के बाद न्याय विभाग, विधायी विभाग और गृह विभाग के अफसरों की राय लेते हैं। इसके बाद अभियोजन स्वीकृति देने या विभागीय कार्रवाई करने का निर्णय किया जाता है। पूर्व परिवहन मंत्री रामअचल राजभर के खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना तेज कर दी है। पूर्व सहकारिता मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा, पूर्व लोक निर्माण, सिंचाई और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी, पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय, पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री राकेश धर त्रिपाठी और पूर्व लघु उद्योग मंत्री चन्द्रदेव राम यादव के खिलाफ बहुत जल्द अभियोग पंजीकृत होगा।
सतर्कता विभाग में आवश्यक प्रक्रिया भी शुरू हो गई है और शासन से निर्देश मिलते ही संबंधित थानों में मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। सतर्कता विभाग ने इन सभी पूर्व मंत्रियों की खुली जांच पूरी कर पिछले दिनों इनकी रिपोर्ट शासन को सौंप कर इनके खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर विवेचना के लिए अनुमति मांगी थी।