तस्वीर में: इसरो में तैनात वैज्ञानिक सत्येंद्र कुमार सिंह। बहराइच. मंगल मिशन फतह में बहराइच का भी योगदान है। यहां के मिंहीपुरवा कस्बे के रहने वाले युवा वैज्ञानिक सत्येंद्र कुमार सिंह भी इस मिशन में शामिल रहे। ऐसे में मंगल मिशन की कामयाबी की खबर मिलते ही उनके परिवार सहित पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। उनके घर पर बधाई देने के लिए कस्बा वासियों का तांता लग गया।
बताते चलें कि सत्येंद्र कुमार सिंह हाईस्कूल की शिक्षा बहराइच शहर स्थित आजाद इंटर कॉलेज, इंटरमीडिएट गांधी इंटर कॉलेज और स्नातक की शिक्षा ठाकुर हुकुम सिंह किसान पीजी कॉलेज से उत्तीर्ण की है। इसके बाद उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एमएसी की शिक्षा ग्रहण की। एमएसी पास करने के बाद वर्ष 2009 में उन्होंने काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) नेट की जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) परीक्षा पास की।
अक्टूबर 2009 में इसरो के अहमदाबाद केंद्र में हुआ चयन
इसके बाद अक्टूबर 2009 में इसरो के अहमदाबाद स्थित अंतरिक्ष उपयोग केंद्र में उनका चयन हो गया। यहां पर उन्होंने पांच महीने तक जूनियर रिसर्च फेलो (कनिष्ठ अनुसंधानकर्ता) के तौर पर कार्य किया। यहां से सफल होने पर अप्रैल 2010 में वे सीधे बेंगलुरु के इसरो सेटेलाइट सेंटर में वैज्ञानिक के तौर पर तैनात हो गए और आज उन्हें इसरो के मंगल मिशन में लगे वैज्ञानिकों की टीम में शामिल होने का गौरव प्राप्त है।
सत्येंद्र ने देश के साथ ही रोशन किया बहराइच का नाम
ऐसे में सत्येंद्र कुमार सिंह ने जहां मंगल मिशन फतह करने वाले वैज्ञानिकों की टीम में शामिल होकर देश का नाम रोशन किया है, वहीं अपने परिवार सहित बहराइच जिले का गौरव भी पढ़ाया है। लोगों का कहना है कि सत्येंद्र की वजह से ही हिन्दुस्तान के इतिहास में बहराइच के मिंहीपुरवा कस्बे का नाम भी सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। मंगल मिशन में शामिल होने की सूचना मिलने के बाद से ही उनके घर पर बधाई देने वालों की तांता लग गया। कस्बावासी उनके परिवार को मिठाइयां खिलाकर बधाइयां दे रहे थे।
आगे पढ़िए इसरो में तैनात वैज्ञानिक सत्येंद्र कुमार सिंह ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई बहराइच से ही पूरी की है…