फोटो: छुड़ाए गए बंधुआ मजदूर।
सहारनपुर. सहारनपुर के देवबंद कोतवाली क्षेत्र से शुक्रवार को तीन गन्ने की चर्खे से 20 बुंधुआ मजदूरों को आजाद कराया गया। हरिद्वार के शांतिकुंज आश्रम के अधिकारियों की शिकायत पर देर शाम पुलिस और प्रशासनिक टीम ने यह कार्रवाई की। छुड़ाए गए सभी बंधुआ मजदूर नेपाल और अन्य राज्यों के निवासी हैं। गन्ने की चर्खियों में इन्हें यातनाएं दी जाती थी। खाने के नाम पर उन्हें सिर्फ दो सूखी रोटी मिलती थी। रोजाना 20 बीस घंटे उनसे लगातार काम कराया जाता था। मजदूरी के एवज में उन्हें कुछ नहीं दिया जाता था।
मामला देवबंद कोतवाली क्षेत्र के गांव राजूपुर का है। यहां स्थित तीन गन्ना चर्खियों पर करीब दो दर्जन लोगों को बंधुआ मजदूर बनाकर रखा गया था। आरोप है कि उन लोगों से चर्खी के मालिक अमानवीय यातनाएं देकर दिन रात कार्य कराता था। करीब बीस घंटे काम लिए जाने के बाद उन्हें दो वक्त की रुखी-सूखी रोटी दी जाती थी। बताया जाता है कि एक दिसंबर की रात में चर्खी से मंसूराम नाम का एक मजदूर किसी तरह भाग निकलने में कामयाब रहा।
शांतिकुंज आश्रम पहुंचा मजदूर
यहां से वह हरिद्वार के शांतिकुंज आश्रम पहुंचा। संबंधित अधिकारियों को अपनी आपबीती सुनाई। आश्रम के पंडित चंद्रशेखर उस मजदूर को लेकर देवबंद पहुंचे। उन्होंने पूरी घटना की जानकारी स्थानीय प्रशासन को दी। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एसडीएम राजेश कुमार सिंह और पुलिस क्षेत्राधिकारी सुरेशपाल सिंह के नेतृत्व में टीम ने चर्खियों में छापा मारा। यहां से 20 मजदूरों को आजाद कराया गया।
एक मजदूर की आपबीती
मजदूर मंसूराम के मुताबिक, 20 नवंबर को उसके सहित करीब 25 मजदूर रुड़की के रास्ते पंजाब जा रहे थे। जैसे ही उनकी ट्रेन रुड़की रेलवे स्टेशन पर पहुंची, तो उन्हें अज्ञात लोगों ने चाकू की नोंक पर स्टेशन पर ही उतार लिया। इसके बाद उन्हें गांव राजूपुर स्थित गन्ने की चर्खी पर लाकर बेच दिया गया। जहां उनसे करीब 20 घंटे रोजाना काम कराया जा रहा था।
आगे पढ़िए, मजदूरों ने बताया चर्खी पर दिया जाता था करंट...