फोटो: गांव का हाल सुनातीं दलित महिलाएं।
झांसी. झांसी से करीब 45 किमी की दूरी एक खैरा नाम का गांव पड़ता है। यहां कुल 300 दलित लोग रहते हैं। कुछ लोगों के घर पक्के हैं, तो ज्यादातर लोग झोपड़ियों और खपरैल के घरों में रहते हैं। इस गांव में रहने वाले सिर्फ तीन परिवार ऐसे हैं, जो उच्च जाति के हैं। बावजूद इसके ये तीन परिवार 300 दलित लोगों पर भारी पड़ते हैं। दलित महिलाएं गांव में खुद को महफूज महसूस नहीं करतीं। उच्च जाति के लोग उनपर बुरी नजर रखते हैं। ऐसे में हर वक्त उन्हें अपनी आबरू लूटने का खतरा बना रहता है।
60 साल की मीरा बताती हैं कि उनके घरों में शौचालय नहीं है। वह खेतों में शौच के लिए जाती हैं। उच्च जाति के लोगों की जमीन के पास वे शौच के लिए नहीं जा सकतीं। वहीं, 28 साल की पुष्पा ने बताया कि उच्च जाति के लोग दलित महिलाओं और युवतियों से छेड़छाड़ करते हैं। मना करने पर पिटाई की जाती है। ऐसे में मजबूरन चुप रहना पड़ता है।
नहीं भर सकते गांव के हैंडपंप से पानी
यहां के दलितों को हैंडपंप से पानी भरने की मनाही है। दलित महिला खिलना ने बताया कि गांव में उनके लिए गिने-चुने नल हैं। इसके अलावा कोई और हैंडपंप छू भी नहीं सकते। यदि नल खराब हो गए, तो उन्हें बच्चों को पिलाने के लिए एक गिलास पानी तक नहीं मिलता है। इसके अलावा वे मंदिरों में नहीं जा सकते। शादी-ब्याह के मौके पर दलित परिवार शोर-शराबा नहीं कर सकते।
चारपाई पर बैठने पर तोड़ दी जाती है टांग
इस गांव की सुगना देवी बताती हैं कि गांव में उच्च जाति के लोगों के सामने चारपाई पर बैठना सख्त मना है। गलती से भी यदि कोई दलित उनके सामने चारपाई या कुर्सी पर बैठ गया, तो उसकी पिटाई की जाती है। लाठी-डंडे से उसके टांग तोड़ दिए जाते हैं। बताते चलें कि गांव में चारपाई पर बैठने पर पैरों में लाठियां मारे जाने की कई घटनाएं हो चुकी हैं।
उच्च जाति के घरों में पुलिस लेती है चाय की चुस्की
इसी गांव के दलित युवक मंगल सिंह ने बताया कि उच्च जाति के घरों में अक्सर पुलिस चाय की चुस्की लेती है। शिकायत करने पर वह कोई सुनवाई नहीं करती। ऐसे में न्याय की उम्मीद और सिर उठाकर जीने की ललक यहां दम तोड़ रही है। वह बताते हैं कि उन्हें बार-बार जान से मारने और गांव से भगा दिए जाने की धमकी दी जाती है। इन सबके बावजूद पुलिस-प्रशासन खामोश बना रहता है।
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