तस्वीर में: दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नौमानी।
सहारनपुर. मदरसों में राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराए जाने को लेकर भाजपा सांसद साक्षी महाराज के दिए गए विवादित बयान पर सोमवार को प्रसिद्ध इस्लामिक संस्था दारुल उलूम देवबंद ने पलटवार किया है। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि देश की आजादी मदरसों की ही देन है। उन्होंने कहा कि यदि मदरसे न होते तो देश में 15 अगस्त और 26 जनवरी मनाने का कोई औचित्य ही नहीं होता। यहां कोई राष्ट्रीय पर्व नहीं मनाए जाते।
बताते चलें कि रविवार को कन्नौज पहुंचे उन्नाव से बीजेपी सांसद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि मदरसों को बंद कर देना चाहिए, क्योंकि उनमें राष्ट्रीयता की शिक्षा नहीं दी जाती है। किसी भी मदरसे में 26 जनवरी और 15 अगस्त को तिरंगा नहीं फहराया जाता है, क्योंकि मदरसों में आतंकवाद की शिक्षा दी जाती है।
लव जिहाद मामले पर उन्होंने कहा कि यह मुस्लिम समाज की सोची-समझी साजिश है और उनके युवकों को हिंदू लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने के लिए अरब देशों से फंडिंग हो रही है।
नौमानी ने कहा- सभी मदरसे देशप्रेम से ओत-प्रोत
दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम नौमानी ने कहा कि आज देश में जो राष्ट्रीय पर्व मनाए जा रहे हैं उन पर्वों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी गतिविधियों में मदरसों का अहम रोल रहा है। उन्होंने सोमवार को dainikbhaskar.com से बातचीत में कहा कि सभी मदरसे देशप्रेम से ओत-प्रोत हैं। केवल झंडा फहराना ही देशभक्ति नहीं होती।
गुमराह करने वाला है साक्षी महाराज का बयान
उन्होंने कहा कि साक्षी महाराज द्वारा 15 अगस्त और 26 जनवरी पर मदरसों में राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने को लेकर दिया गया बयान देश और समाज को गुमराह करने वाला है। देश की आजादी में सबसे बड़ा योगदान उलेमा और मदरसों का ही है। ऐसे में साक्षी महाराज द्वारा यह कहा जाना कि मदरसों में राष्ट्रीयता की शिक्षा नहीं दी जाती, बेमानी है।
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