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EXCLUSIVE: डीएम-कमिश्‍नर सालभर में डकार गए 33 लाख की दवा

9 वर्ष पहले
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आगरा. मरीजों के दवाओं के लिए सरकार ने जिला अस्‍पताल को 80 लाख रुपए दिए। इनमें से 29 लाख रुपए की दवाएं आगरा के डीएम, कमिश्‍नर, जज और दूसरे अफसर खा गए। बाकायदा इतनी रकम से अफसरों के लिए दवाएं खरीदी गई। डीएम आवास को 11.60 लाख और मंडलायुक्‍त आवास को 11.31 लाख रुपए की दवाएं एलॉट हुई। यह रिकॉर्ड हैं जिला अस्‍पताल के स्‍टोर रूम का। साल भर में इतनी सारी दवाएं खा जाना अपने आप में अलबेली बात है। वह भी बिना किसी बीमारी के। यह खुलासा हुआ है सूचना के अधिकार कानून के तहत।
दरअसल, यूपी सरकार हर जिले के सरकारी अस्‍पतालों को दवाएं मुहैया करवाती हैं। इसके बावजूद जरूरी दवाओं की किल्‍लत रहती है। ऐसी स्थिति से मरीजों को उबारने के लिए सरकार जिला अस्‍पताल को स्‍थानीय तौर पर दवाएं खरीदने का अधिकार देती हैं। ताकि जो दवाएं अस्‍पताल में मौजूद न हों, उन्‍हें खरीदकर मरीजों को दी जाए। आगरा के जिला अस्‍पताल को वर्ष 2011 में 80 लाख रुपए जारी हुए। इसके बावजूद डॉक्‍टर मरीजों को निजी मेडिकल स्‍टोर से दवाएं खरीदने को मजबूर कर रहे थे।
दैनिक भास्‍कर ने असलियत जानने के लिए सूचना के अधिकार के तहत जिला अस्‍पताल के मुख्‍य चिकित्‍सा अधीक्षक से जानकारी मांगी। पहले तो जवाब देने में आनाकानी की गई। लेकिन पांच महीने बाद मिला जवाब चौकाने वाला था। अधिकतर राशि पर अफसरों ने ही कब्‍जा कर लिया था। अस्‍पताल के चीफ फार्मासिस्‍ट एसपी सिंह ने जवाब में कहा है कि 11.60 लाख रुपए की दवाएं खरीदकर डीएम आवास (कैंप) को दी गई। जबकि मंडलायुक्‍त आवास को 11.31 लाख रुपए और जज को 3.61 लाख रुपए की दवाएं और अन्‍य अफसरों को 2.48 लाख की दवाएं दी गईं।
आरटीआई के तहत हुए खुलासे इस बात को जाहिर करते हैं कि गरीब मरीजों के नाम पर आए लाखों रुपए अफसर हड़प कर गए। जबकि मरीज पहले की तरह अब भी महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर है। गुरुवार को जिला अस्‍पताल में इलाज करवाने आए शाहगंज की मरीज शकुंतला ने बताया कि उसे डॉक्‍टर ने जो दवा लिखी वह अस्‍पताल में नहीं है। अब उसे मेडिकल स्‍टोर से ही दवाएं खरीदने को कहा गया है।
इधर, आगरा के डीएम अजय चौहान का कहना है कि उन्‍होंने इतनी रकम की दवाएं नहीं मंगवाई है। अस्‍पताल के आरटीआई जवाब देखकर डीएम अजय चौहान चौंक गए। उन्‍होंने गड़बड़ी की आशंका जताते हुए बताया कि वह इसकी जांच करवाएंगे। जल्‍द इस मामले की असलियत का खुलासा हो जाएगा। दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस ने आरोप लगाया कि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग और प्रशासनिक अफसर मिलकर जनता का हक मार रहे हैं।
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