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PHOTOS: यहां जंजीरों में जकड़ी है 'जिंदगी' इलाज के नाम पर दी जाती हैं यातनाएं

7 वर्ष पहले
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तस्‍वीर में: जंजीरों में बंधा मानसि‍क मरीज।
ह्यूमन राइट्स डे: हर साल 10 दि‍संबर को 'ह्यूमन राइट्स डे' मनाया जाता है। यूपी में कई ऐसी जगह हैं, जहां आज भी लोग अपने अधि‍कारों से वंचित हैं। निजी स्‍वार्थ के चलते उनपर अत्‍याचार किया जा रहा है। इस कड़ी में dainikbhaskar.com आपको ऐसी घटनाओं से रूबरू करा रहा है।
बदायूं/लखनऊ. एक तरफ देश मंगल ग्रह और चांद पर अपने अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दे चुका है, तो दूसरी तरफ अब भी दकियानूसी तरीकों से मानसिक रोगों का इलाज किया जाता है। इस दौरान मानव अधि‍कारों की धज्‍जि‍यां उड़ा दी जाती हैं। इसका जीता जागता उदहारण दि‍खा बदायूं की दरगाहों में। वहां मानसिक रोगियों को जंजीरों में जकड़ कर रखा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से मानसिक रोगी 40 दिनों में स्वस्थ होकर घर लौट जाते हैं। इस जगह को बड़े सरकार और छोटे सरकार की दरगाहों के नाम से जाना जाता है।
दरगाह से मात्र दस किलोमीटर की दूरी पर उझानी के रहने वाले अब्बास ने बताया कि उनके ऊपर किसी बुरी आत्मा का साया आ गया था। कई तरह के डॉक्टरों से इलाज कराने के बाद भी जब मर्ज ठीक नहीं हुआ तो परिवार वाले उन्हें बड़े सरकार की मजार पर ले आए। अब्बास अभी बेड़ियों में जकड़े पड़े थे, लेकिन उनका कहना था कि बड़े सरकार ने उन्हें बिल्‍कुल भला-चंगा कर दिया है। उनके आसपास के लोग इतने खुशनसीब नहीं थे। इसलिए वे अब भी बेड़ियों में जकड़े अपनी एड़ि‍यां रगड़ रहे थे।
बड़े सरकार की नजर से पत्थर शरीर भी हुआ ठीक
बदायूं में मौजूद बड़े शरीफ की मजार के बारे में भी कहा जाता है कि यहां आने वाला हर रोगी बिल्‍कुल स्वस्थ होकर लौटता है। बड़े सरकार के बारे में कहा जाता है कि उनके पास एक बार एक ऐसा मरीज पहुंचा, जिसका आधा जिस्म पथरीला हो चुका था। (आम तौर पर यह लक्षण लकवे के मरीजों में पाया जाता है)। बड़े सरकार ने मरीज के शरीर के उस हिस्से को घूरना शुरू किया जो जड़ हो चुका था।
कहते हैं कि उनके देखते-देखते मरीज के शरीर का वह हिस्सा ढीला पड़ने लगा और उसके अंग हिलने लगे। कुछ दिनों में वह मरीज भला-चंगा होकर अपने घर चला गया। बड़े सरकार का दावा था कि यदि‍ कोई मरीज उनसे तीन दिनों के अंदर ठीक नहीं होता, तो लोग उन्हें जिंदा ही कब्र में दफना सकते हैं।
आगे पढ़ि‍ए कौन हैं बड़े सरकार...