पीड़ित दलित की फाइल फोटो (ऑरेंज टी-शर्ट में)
- एक दिन पहले ही एससी-एसटी आयोग के डायरेक्टर ने की थी जांच
- डायरेक्टर के जाते ही दलित को अस्पताल में इलाज के दौरान ही भेजा जेल
- एसएसपी ने कहा- दलित रहता था छेड़छाड़ में लिप्त
झांसी. मलमूत्र खिलाने और प्राइवेट पार्ट्स को झुलसाए जाने के मामले में पुलिस ने दलित को ही जेल भेज दिया है, जबकि पांचों आरोपियों को पुलिस ने रिहा कर दिया। एससी-एसटी आयोग के डॉयरेक्टर ने मामले में एक दिन पहले ही दिल्ली से झांसी आकर मामले की जांच की थी। डॉयरेक्टर ने स्वीकार भी किया था कि मामले में पुलिस की भूमिका कहीं न कहीं संदिग्ध है। इसके बाद भी सोमवार को दलित युवक को ही अस्पताल से जेल भेज दिया गया। साथ ही उसपर चोरी के बाद अब छेड़छाड़ का नया मामला दर्ज किया गया है।
एसएसपी शिवसागर सिंह का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ दर्ज की गई रिपोर्ट की जांच की जा रही है, जबकि दलित के खिलाफ छेड़छाड़ के आरोप पाए गए हैं। अन्य धाराओं के साथ ही प्राइवेट पार्ट झुलसाए जाने की धारा 285 के साथ ही एससी-एसटी आयोग के तहत मामला दर्ज होने के बाद रक्सा के ही पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। दस दिनों से आरोपी थाने में ही बैठे थे।
बताते चलें कि 19 सितंबर को झांसी के रक्सा निवासी दलित सुजान सिंह उर्फ सुन्नू को मलमूत्र खिलाए जाने और प्राइवेट पार्ट्स को आग लगाकर झुलसाए जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद दलित के सिर पर चौराहा बनाकर एक ओर की मूंछ साफ कर दी गई थी। उसके गले में जूतों की माला पहनाई गई थी। दलित ने आरोप लगाया था कि जमीन के विवाद में रात में अपहरण किए जाने के बाद उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।
पुलिस ने घटना के दिन ही दलित पर चोरी करने का मामला दर्ज कर मुचलके पर रिहा कर दिया था, लेकिन मीडिया द्वारा मामले को उछाले जाने के बाद पुलिस ने आनन-फानन में पांच आरोपियों पर मामला दर्ज गिरफ्तार भी कर लिया था।
आगे पढ़िए आयोग जांच ही करता रह गया, पीड़ित भेज दिया गया जेल...