झांसी. मनरेगा ग्राम सेवकों ने अपने नियमितिकरण और मानदेय के लिए अलग से बजट की व्यवस्था करने के लिए डीएम ऑफिस का घेराव किया। उनकी मांग है कि उन्हें शिक्षामित्रों की तरह नियमित किया जाए और जबतक नियमित नहीं करते तब तक दस हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय दिया जाए।
बताते चलें कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत लगे ग्राम रोजगार सेवक सरकार से खफा हैं। ये लोग बीते छह साल से नियमित कर्मचारियों के समान वेतन की मांग कर रहे हैं। इस वर्ग का कहना है कि उनके लिए अभी तक सरकार ने कोई नीति तैयार नहीं की है।
राज्य में 11 सौ ग्राम सेवक कार्यरत
राज्य में इस समय करीब 11 सौ ग्राम रोजगार सेवक कार्यरत हैं। घेराव कर रहे ग्राम सेवकों ने कहा कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गई तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उन्होंने बताया कि इस समय ग्राम रोजगार सेवकों को मात्र 3,630 रुपए प्रति माह मानदेय मिलता है। उनका कहना है कि महंगाई के समय में इतने कम मानदेय में वह अपना गुजारा नहीं हो पा रहा है।
साल 2008 में किया गया था चयन
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत ग्राम रोजगार सेवकों का चयन 2008 में किया गया। मनरेगा के तहत प्रत्येक सेवक को तीन-तीन पंचायतों का ग्रुप बनाकर कार्य का सारा डाटा एमआईएस में चढ़ाने का कार्य दिया गया है।
तस्वीर में: डीएम ऑफिस के बाहर प्रदर्शन करते ग्राम रोजगार सेवक।