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पायलट को नहीं मिली सैलरी तो कोर्ट ने विजय माल्या को भेजा सम्मन

7 वर्ष पहले
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विजय माल्या की फाइल फोटो।
मेरठ/बुलंदशहर. मंदी और घाटे के नाम पर कर्मचारियों के करोड़ों रुपए डकारने वाली किंगफिशर एयरलाइंस कंपनी के खिलाफ बुलंदशहर के एक को-पायलट ने मोर्चा खोल दिया है। अपनी तनख्वाह के 40 लाख रुपए वसूलने के लिए पायलट ने किंगफिशर एयरलाइंस के मालिक और सीईओ के खिलाफ बुलंदशहर कोर्ट में क्रिमिनल केस दायर किया है। बुधवार को पायलट के वकील की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने किंगफिशर के मालिक विजय माल्या और उनकी कंपनी के सीईओ संजय अग्रवाल को सम्मन जारी करते हुए छह अक्टूबर को कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है। आदेश की प्रति पुलिस अधीक्षक बंगलुरू को भेज दी गई है।
बुलंदशहर के को-पायलट आकाश शर्मा ने फरवरी 2006 में डेक्कन एयरलाइंस में को-पायलट के तौर पर ज्वाइन किया था। 2008 में किंगफिशर ने डेक्कन का अधिग्रहण कर लिया। इस अधिग्रहण के बाद पायलट आकाश को दो लाख छब्बीस हजार रुपए प्रति माह तनख्वाह मिलती थी। लेकिन अगस्त 2012 से किंगफिशर ने मंदी और घाटे की बात कहते हुए आकाश और उसके जैसे अन्य कर्मचारियों की तनख्वाह रोक दी।
अधिग्रहण के बाद किंगफिशर ने आकाश का टीडीएस तो काटा लेकिन आयकर विभाग में उसे जमा नहीं किया। आकाश शर्मा के अधिवक्ता राजेंद्र शर्मा ने बताया कि एसीजेएम प्रथम उमाकांत जिंदल की अदालत से यह आदेश छह सितंबर को जारी किया गया है। उसने बकाया टीडीएस, वेतन और भविष्य निधि की रकम करीब 40 लाख रुपए की मांग को लेकर अदालत में केस दायर किया है। कर्मचारी का टीडीएस लेकर उसे आयकर विभाग में जमा न करना अदालत ने धोखाधड़ी माना है।
किंगफिशर को अदालत ने आपराधिक मामले का दोषी माना है। आईपीसी की धारा 406 और 420 के तहत दर्ज हुए परिवाद में विजय माल्या और संजय अग्रवाल बुलंदशहर के एसीजेएम कोर्ट में 6 अक्टूबर को हाजिर होने के लिए कहा गया है।
आगे तस्वीर में देखिए वह शख्स जिसने विजया माल्या के खिलाफ दर्ज कराई थी रिपोर्ट...