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यूपी में आरटीआई के दायरे से लोकायुक्त बाहर

8 वर्ष पहले
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने लोकायुक्त को सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे से बाहर कर दिया है। सरकार ने यह जानकारी पिछले दिनों एक आरटीआई अर्जी पर राज्य सूचना आयोग के समक्ष दी है।
लोकायुक्त के जनसूचना अधिकारी अरविंद कुमार सिंघल ने गत शुक्रवार को मुरादाबाद के आरटीआई कार्यकर्ता सलीम बेग की अर्जी पर राज्य सूचना आयोग में पेशी के दौरान दी गई लिखित जानकारी में बताया, आरटीआई की धारा आठ के तहत अन्वेषण एजेंसियां आच्छादित नहीं हैं तथा लोक आयुक्त प्रशासन एक अन्वेषण एजेंसी है। इसी आधार पर शासन द्वारा तीन अगस्त 2012 को इस सिलसिले में अधिसूचना जारी कर लोकायुक्त कार्यालय को सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के दायरे से बाहर कर दिया है।
बेग ने 10 मई 2012 को आरटीआई अर्जी देकर लोकायुक्त कार्यालय से 13 मई 2007 से आठ मई 2012 तक प्रदेश के विभिन्न जिलों से मुखालफत विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत करने वाले लोगों के नाम पतों की सूची तथा उन शिकायतों पर की गई कार्यवाही एवं निस्तारित तथा दोषसिद्ध शिकायतों की जिलेवार और वर्षवार सूची मांगी थी। साथ ही उन्होंने लोकायुक्त में दर्ज शिकायत के निस्तारण की समय सीमा एवं शुल्क की जानकारी भी मांगी थी।
इस पर 22 मई 2012 को लोकायुक्त कार्यालय द्वारा दिए गए जवाब में कहा गया था कि उत्तर प्रदेश लोकायुक्त तथा उप लोकायुक्त अधिनियम 1975 के प्रावधानों के मद्देनजर अभिलेखों की प्रतियां दिया जाना संभव नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि शिकायतों के निस्तारण की कोई समय सीमा तय नहीं है।