मुजफ्फरनगर/मेरठ. यूपी के मुजफ्फरनगर और शामली में हुए सांप्रदायिक दंगो के बाद बांटी गई मुआवजा राशि अभी भी कुछ पीडि़तों को नहीं मिली है। ये पीडि़त पिछले 15 महीने से मुआवजा राशि पाने की आस लगाए बैठे हैं।
बताते चलें, मुजफ्फरनगर के तहसील बुढ़ाना के गांव जोला में कैंप लगाकर रह रहे 136 दंगा पीडि़त परिवारों को राहत मिल गई है। इनमें से 101 परिवार को सरकार ने जांच के बाद 5-5 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत कर दी है। यह राशि पिछले कई दिनों से पीडि़तों को आवंटित की जा रही है।
सांप्रदायिक दंगो के बाद करीब 136 परिवार शामली में अपना घर छोड़कर मुजफ्फरनगर के गांव जोला में कैंप लगाकर रहने लगे थे। शामली प्रशासन ने इन लोगों को दंगा पीड़ित नहीं मानते हुए मुआवजे की धनराशि से वंचित कर दिया था। इसके बाद मेरठ मंडल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी का गठन किया गया। जांच अधर में लटकने के बाद जांच कमेटी का गठन मुरादाबाद कमिश्नर की अध्यक्षता में किया गया। इस कमेटी ने सिर्फ 101 परिवारो को पीडि़त मानते हुए मुआवजा धनराशि जारी कर दी।
इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों जांच के आदेश दिए गए हैं। हालांकि, अभी तक कोई जांच रिपोर्ट नहीं आई है। जांच में यह पता किया जा रहा है कि आखिर इन पीडि़त परिवारों को क्यों नजरंदाज किया गया। ग्रामीणों की शिकायत पर ही दो महीने पहले यूपी सरकार ने मुरादाबाद के कमिश्नर शिवशंकर सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। कमेटी के सदस्यों ने गांव में जाकर दौरा किया था। उनकी रिपोर्ट पर ही हसनपुर के 101 परिवारों को दंगा पीडित परिवार घोषित किया गया था और उन्हें 5-5 लाख रुपए प्रति परिवार के हिसाब से मुआवजा दिया गया था।
फाइल फोटो: मुजफ्फरनगर दंगे के बाद राहत शिविर में रहते हुए पीडि़त परिवार।