तस्वीर में: थाना परिसर के अंदर इसी जगह मिट्टी में दबाए गए हैं बम।
मेरठ/मुजफ्फरनगर. एनएच-58 पर स्थित मंसूरपुर थाना जिंदा बमों का कब्रिस्तान बन चुका है। तीन दिन पहले घासीपुरा गांव में सड़क के पास से बरामद हुए दो रॉकेट बमों को पुलिस ने थाना परिसर में ही जमीन में दबा दिया है। यही नहीं साल 2004 में बरामद करीब दो दर्जन बमों को भी इसी थाने में जमीन में दबाया गया है। परिसर की जमीन में इतने बम दबे होने से यह थाना बमों का कब्रिस्तान बन गया है। वहीं पुलिस की यह लापरवाही थाने के अलावा आसपास की आबादी के लिए भी खतरा बन गई है।
बताते चले थाना क्षेत्र के घासीपुरा के पास 24 सितंबर को दो रॉकेट लांचर बम बरामद हुए थे। इसके बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था। सूचना पर पुलिस के अलावा बम निरोधक दस्ता भी पहुंचा था। जांच पड़ताल के बाद पुलिस ने दोनों बमों को अपने कब्जे में ले लिया था। पुलिस का कहना था कि बरामद बम रॉकेट लांचर है, लेकिन काफी पुराने होने के कारण इनमें बारूद होने की संभावना काफी कम है। पुलिस ने इसकी जांच सेना के विशेषज्ञों द्वारा ही किए जाने की बात कही है। पुलिस ने सेना की टीम आने तक बरामद दोनों बमों को थाना परिसर में पीछे की ओर मिट्टी में दबा दिया है।
पहले भी मिट्टी में दबाए गए थे बम
साल 2004 में भी हाइवे पर स्थित एक सरिया फैक्ट्री में स्क्रैप गलाते समय हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत हुई थी। घटना के बाद पुलिस ने फैक्ट्री पहुंचकर जांच पड़ताल की थी। तब वहां से करीब दो दर्जन बम स्क्रैप में पड़े मिले थे। इन बमों को भी पुलिस ने जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया था। बाद में बरामद बमों को थाना परिसर में ही मिट्टी में दबा दिया गया था।
सूत्रों का कहना है कि जांच के नाम पर कागजी कार्रवाई तो पूरी हो गई लेकिन पुलिस ने जमीन में दबे बमों का अभी तक निष्क्रिय नहीं किया है। अब 24 सितंबर को बरामद हुए दो बमों को भी पुलिस ने थाना परिसर में ही दबा दिया गया।
आगे पढ़िए आखिर कब तक दबे रहेंगे ये बम इस थाना परिसर में....