झांसी. सख्त तेवर और काम को एक अलग अंदाज में करने की वजह से एसओ डॉ. रंजना गुप्ता अब लेडी
सिंघम नाम से मशहूर हैं। ये फिल्मी अंदाज में अपराधियों के कॉलर को पकड़ लेती हैं। डिग्री कॉलेज में कभी लेक्चरर रही एसओ डॉ. रंजना अंतरराष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज भी हैं। यूपी सरकार इन्हें लक्ष्मण पुरस्कार भी देकर सम्मानित कर चुकी है।
इन दिनों झांसी की महिला एसओ डॉ. रंजना गुप्ता चर्चा का विषय बनी हुई हैं। फिल्मी स्टाइल में अपराधियों से निपटने और गलती होने पर समझाने के अंदाज से वह लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुकी हैं। लेडी सिंघम के नाम से मशहूर झांसी की यह महिला थानेदार चौराहों और सड़कों पर अपनी टीम के साथ खड़ी होकर चेकिंग शुरू कर देती हैं।
शराब पीकर गाड़ी चलाने से खाते हैं खौफ
यह लेडी सिंघम शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों को कतई नहीं छोड़ती। वाहन चेकिंग के दौरान यदि कोई नशे में गाड़ी चलाता हुआ मिल जाता है उसे जुर्माना भरना ही पड़ेगा। कई बार तो लेड़ी सिंघम स्वयं ऐसे लोगों का कॉलर पकड़ लेती हैं। इस दौरान कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो कहते हैं कि उनके पापा या फिर चाचा पुलिस में हैं। इसके बाद भी किसी की कोई सुनवाई नहीं होती है।
शोहदों में है लेडी सिंघम का खौफ
लड़कियों को परेशान करने वाले शोहदों के बीच भी रंजना गुप्ता उर्फ लेडी सिंघम का खौफ है। एसओ खुद स्कूल कॉलेजों के आसपास और संवेदनशील जगहों पर नजर रखती हैं। झांसी में तैनाती मिलने के बाद महिलाओं के साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाओं में काफी कमी आई है। लेड़ी सिंघम कहती हैं कि लोगों को इस तरह सबक सिखाना जरूरी है।
आगे पढ़िए लेड़ी सिंघम 2007 में बनी थीं एसआई...