तस्वीर में: पीएम नरेंद्र मोदी के साथ मौजूद इसरो वैज्ञानिक कमलेश कुमार शर्मा।
गाजीपुर/वाराणसी. गाजीपुर की धरती के अनेकों लोग अपने होनहारी से जिले का ही नहीं बल्कि समूचे भारत का नाम संसार में रोशन कर रहे हैं। ऐसे ही एक होनहार का नाम है कमलेश कुमार शर्मा। इनके हाथों में
मंगलयान की डोर है। ये मंगलयान अभियान में प्राइम कंट्रोलर के रूप में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन 'इसरो' की महत्वाकांक्षी परियोजना मार्स आर्बिटर मिशन भारत का प्रथम मंगल अभियान है। यह जानकर गर्व होगा कि भारतीय अंतरिक्ष शोध में मिशाल के रूप में उभरकर आने वाले इस मंगलयान की डोर गाजीपुर के हाथों में है।
रेवतीपुर निवासी वेद प्रकाश शर्मा इसरो में वैज्ञानिक हैं। वे मंगलयान अभियान में प्राइम कंट्रोलर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सफलता के साथ निभा रहे हैं। मंगलयान की सफलता के इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने इसरो पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी पीठ थपथपा कर शाबाशी दी।
मंगलयान की प्रत्येक गतिविधि पर विशेष नजर और नियंत्रण रखने का जिम्मा कमलेश कुमार शर्मा को दिया गया है। उनकी प्रतिभा बयान करने के लिए ये काफी भी है। जिले के रेवतीपुर गांव में सामान्य परिवार में 15 सितंबर 1986 को जन्मे कमलेश की प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। हाईस्कूल और इंटर की शिक्षा आदर्श इंटर कालेज महुआबाग से ली। 12वीं में कमलेश ने पूरे जिले में टॉप किया था। इसके बाद की पढ़ाई लखनऊ यूनिवर्सिटी से हुई। साल 2008 में गणित से परास्नातक करने वाले कमलेश ने कुल 10 गोल्ड मेडल प्राप्त किए। जिससे उनका मेधावीपन साफ नजर आता है। अप्रैल 2010 में उन्होंने बतौर वैज्ञानिक इसरो से जुड़ गए।
आगे देखिए इसरो में मंगलयान की सफलता पर खुशी मनाते कमलेश की तस्वीरें...