फोटो: स्टोन कटर रामदास और मजदूर के बच्चों के साथ ग्रुप फोटो खिंचवाते अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा।
झांसी. दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के राष्ट्रपति से मिलना और उनके हाथों से तोहफा हासिल करना एक सपने के पूरा होने जैसा है। झांसी के रामदास ऐसे ही सौभाग्यशाली लोगों में से एक हैं। बीते नवंबर 2010 में राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उनसे और उनके पूरे परिवार से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान उन्हें 'सील ऑफ द प्रेसिडेंट' के साथ ही एक पेन भी भेंट किया गया था।
रामदास इस कीमती तोहफे को वापस करना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि, पीएम
नरेंद्र मोदी इस तोहफे को अपने हाथों से बराक ओबामा को सौंपे। आगामी 28 सितंबर को मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर अमेरिका जा रहे हैं। वे कहते हैं कि बुधवार को पीएम अपना 64वां जन्मदिन मना रहे हैं। ऐसे में वो उनसे मुलाकात कर अपना दुख भी बयां करना चाहते हैं।
दरअसल, साल 2007 में भारतीय पुरातत्व विभाग ने कार्यरत मजदूरों के बच्चों के लिए दिल्ली के तुगलकाबाद में एक स्कूल खोला था। इस स्कूल की जिम्मेदारी स्टोन कटर रामदास को दी गई। अपने दौरे पर आए बराक ओबामा ने जब उनकी और उनके बेटे नरेंद्र की शिक्षा के प्रति लगन देखी तो उन्हें प्रेरित करने के लिए 'सील आफ द प्रेसीडेंट' और एक पेन तोहफा में दिया।
दुर्भाग्य ये है कि, ओबामा के जाने के कुछ दिनों बाद ही पुरातत्व विभाग द्वारा स्कूल को बंद कर दिया गया। रामदास ने कहा 'ओबामा ने जो सपना देखा और दिखाया था, वो लगभग टूट चुका है।' अब स्कूल बंद होने के कारण कोई बच्चा पढ़ने नहीं आता है। ऐसे में वह प्रेरणा देने के लिए उनकी भेंट की हुई चीजें भी वापस करना चाहते हैं।
आगे पढ़िए कैसे शुरू हुआ था रामदास का ऐतिहासिक सफर...