सहारनपुर में लंकेश रामलीला मंचन के रिहर्सल के दौरान टैक्स लगाते हुए (तस्वीर में)
- रोचक अंदाज में होता है रावण का मंत्री से संवाद
- सारथी बनने के लिए लगती है बोली
- काल को वश में करने के बाद निकलते हैं लंका नरेश
सहारनपुर/मेरठ. पश्चिमी यूपी में रामलीला के मंचन की तैयारी चल रही है। इसके लिए कलाकारों का रिहर्सल भी किया जा रहा है। इसको लेकर सड़कों का नजारा भी बदल जाता है। पूरे देश में इस तरह से रामलीला की तैयारी नहीं होती। यही वजह है कि हर कोई सहारनपुर की रामलीला में लंकेश के आदेश और इस तरह के मंचन को देखना चाहता है।
रामलीला मंचन की शुरूआत सहारनपुर में बिलकुल अलग तरीके से होती है। लंकेश सेनापति के साथ हाथी की सवारी करते है, साथ में बैंड बाजा होता है। यह परंपरा 111 साल से चली आ रही है। यहां पहली बार 1903 में लंकेश ने सवारी निकाली थी। उस समय अंग्रेजों से अनुमति लेनी पड़ती थी और अंग्रेज अधिकारी अहम रोल अदा करते थे।
रामलीला मंचन की शुरूआत आमतौर पर श्रवण कुमार के नाटक से होती है, लेकिन सहारनपुर की रामलीला और श्रवण कुमार के नाटक से नहीं लंकाधिपति रावण की सवारी के साथ होती है। इस दौरान लंकेश कारोबारियों पर भारी भरकम टैक्स लगाते हैं। जिसकी वसूली रावण दरबार के राजस्व अधिकारी करते हैं, हालांकि बाद में इसमें छूट दे दी जाती है।
बड़ी ही रोचक है लंकेश की सवारी
लंकाधिपति लंकेश रावण की सवारी बड़ी ही रोचक होती है। यहां के बाजारों में जब उनकी सवारी निकलती है, तो कारोबारियों के पसीने छूट जाते हैं। रावण कब किस पर टैक्स थोप दें और किस कारोबारी को अपने दरबार में पेश होने का हुकम सुना दें, इसका किसी को कुछ पता नहीं रहता। एक हाथी पर लंकेश सवार होते हैं, तो उनके साथ में चलने वाले दूसरे हाथी पर उनके मंत्री सवार रहते हैं। मंत्री अपने हाथ में एक लेखा-बही लिए होते हैं। रावण हुंकार भरते हुए भ्रमण करते हैं।
आगे पढ़िए, कुछ इस तरह होता है रावण का मंत्री से संवाद...