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नरसंहार का गवाह है यह 'भूत बंगला', यहां दिन में भी रहता है सन्नाटा

7 वर्ष पहले
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तस्वीर में: न्यू भगत सिंह कॉलोनी स्थित अरसे से बंद पड़ी कोठी, इसे ही कहते हैं लोग 'भूत बंगला'।
सहारनपुर. तस्वीरों में जो कोठी आप देख रहे हैं, वह ऐसे ही नहीं बंद पड़ी है। आज के वक्त में इस कोठी के पास खड़े होने से लोग न केवल रात में बल्कि दिन में भी घबराते हैं। इनका डर जायज भी है। कुछ साल पहले इसी कोठी में बदमाशों ने नरसंहार करते हुए बड़ी ही बेरहमी से पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया था। तब से यहां पर ताला लटक रहा है। इस वजह से आस-पास का इलाका और गलियां भी सुनसान पड़ी रहती हैं। इस कोठी को अब लोग 'भूत बंगला' कह कर पुकारने लगे हैं।
हैवानियत का शिकार हुए इस कोठी के लोगों की चीखे अक्सर लोगों को सुनाई देती हैं। इस बंगले के आस-पास हर वक्त सन्नाटा पसरा रहता है। न ही कोई इसके बारे में बात करता है और न ही कोई इसके पास जाता है। कई लोग तो इस कोठी के पास बने घरों को छोड़ कर दूसरी जगह शिफ्ट हो गए। 26 मई 2011 की रात का खौफ पूर इलाके में आज भी दहशत कायम किए हुए है।

क्या हुआ था उस रात?
26 मई 2011 की रात सहारनपुर की पॉश कालोनियों में शुमार बाजोरिया रोड स्थित न्यू भगत सिंह कॉलोनी का एक बंगला खूनी रात में रंग गया। दरअसल प्रदीप सहगल, उनके पिता रमेश सहगल, पत्नी प्रीति, बेटे वासु और कृष्ण को रेलवे लाइन के रास्ते घर में घुसे बदमाशों ने बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। बदमाशों ने पूरे परिवार को लोहे की रॉड से पीट-पीटकर मौत की नींद सुला दिया था। नरसंहार के बाद सहारनपुर से लेकर लखनऊ तक अधिकारी हिल गए थे। डीजीपी ने तत्काल प्रभाव से एसएसपी, सीओ और थाना जनकपुरी एसओ को हटा दिया था। हालांकि, पुलिस ने कुछ दिन बाद खुलासा करके कुछ हत्यारोपियों को पकड़ने का दावा जरूर किया था लेकिन आज भी मुख्य आरोपी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ सका। इसका मलाल सहारनपुर के लोगों को हमेशा रहेगा।
आगे पढ़िए साढ़े तीन सालों से नहीं खुले कोठी के ताले...