लखनऊ. लोकसभा चुनाव का अभी भले एक वर्ष बचा हो लेकिन उत्तर प्रदेश के दो बड़े दलों सपा और बसपा में ब्राह्मण मतों को अपनी ओर खींचने की होड़ लग गई है। इसी के मद्देनजर सपा रविवार को यहां परशुराम जयंती समारोह का आयोजन कर रही है। समारोह में पार्टी के ब्राह्मण चेहरों के साथ ही अयोध्या और मथुरा के प्रतिष्ठित संत महंतों को भी आमंत्रित किया गया है। समारोह के जरिए सपा बताएगी कि वही ब्राह्मणों की सही हितैषी है क्योंकि उनके पूर्वज माने जाने वाले परशुराम की जयंती पर सार्वजनिक छुट्टी की शुरुआत मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्रित्वकाल में हुई थी।
समारोह में मुख्य अतिथि मुलायम सिंह यादव होंगे, जबकि विशिष्ट अतिथि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बनाया गया है। इसके अलावा लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव एवं विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय भी इस मौके पर मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी समाजवादी चिंतक सूर्यकांत पाण्डेय को सौंपी जा सकती है। कार्यक्रम के संयोजक एवं राज्य के मनोरंजन कर राज्य मंत्री तेज नारायण उर्फ पवन पाण्डेय का दावा है कि समारोह पार्टी के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
मनोरंजन कर राज्य मंत्री ने कहा कि समारोह के माध्यम से पार्टी की ओर से समाज के लिए किए गए कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा। दूसरी ओर ब्राह्मणों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश में बसपा भी पीछे नहीं है। बसपा ने ब्राह्मणों के हाल ही में दो सम्मेलन कराए। एक लखनऊ में और दूसरा संत कबीरनगर में। संत कबीरनगर में पार्टी के ब्राह्मण चेहरा सतीश चन्द मिश्र सम्मेलन के दौरान ही बेहोश होकर गिर पड़े थे।
बसपा ने ब्राह्मणों में अपनी गहरी पैठ बनाने के लिए लोकसभा के घोषित 36 प्रत्याशियों में 18 टिकट ब्राह्मणों को दे दिए। बसपा की ब्राह्मणों के 36 सम्मेलन कराने की योजना है। चुनाव के मद्देनजर सपा ने अति पिछड़ों का भी सम्मेलन हाल ही में कराया था। अति पिछड़ों में आने वाली 17 जातियों का सम्मेलन कर सपा ने इन्हें अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश की। पार्टी ने निषाद, कश्यप, बिंद समेत अति पिछड़ी 17 जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने की मुहिम भी चला रखी है।