झांसी. झांसी की महिला एसओ डॉ. रंजना गुप्ता को पूरा झांसी 'लेडी
सिंघम' के नाम से जानता है। ये बदमाशों से बिल्कुल फिल्मी अंदाज में निपटती हैं। जब कहीं बड़ी मुठभेड़ की आशंका होती है, तो कमान इन्हें ही सौंपी जाती है। इनके समर्पण और लोकप्रियता को देखते हुए यूपी सरकार इन्हें लक्ष्मण पुरस्कार भी दे चुकी है। ये अंतरराष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज रहते हुए कई अवॉर्ड भी जीत चुकी हैं।
झांसी में तैनाती मिलने के कारण इस लेडी सिंघम को आमजन रानी लक्ष्मीबाई के नाम से भी पुकारते हैं। ये मूल रूप से कानपुर देहात क्षेत्र की निवासी हैं। अपराधियों के प्रति इनकी सख्ती इन्हें दूसरे प्रशासनिक अधिकारियों से अलग करती है। अपराधी इनके सामने आने से भी खौफ खाते हैं। सूत्रों की मानें तो, यहां तैनाती मिलने के बाद क्राइम का ग्राफ जरूर कम हुआ है। ये लेडी सिंघम का ही कमाल हो सकता है।
छोड़ दी लेक्चरर की आरामदायक नौकरी
डॉ. रंजना गुप्ता ने साल 2007-08 में डिग्री कॉलेज में लेक्चरर की आरामदायक नौकरी छोड़ दी। इसके बाद वे पुलिस विभाग से जुड़ीं। रंजना शुरू से ही तेजतर्रार रही हैं। ट्रेनिंग के दौरान ही उन्हें एक गैंग के साथ मुठभेड़ करने के लिए पुलिस टीम में शामिल किया गया। वह इस टीम में शामिल होने वाली अकेली महिला पुलिस अधिकारी थीं। पुलिस टीम ने इस गैंग से मुठभेड़ करते हुए एक अपहृत व्यक्ति को रिहा भी करा लिया था। इसमें रंजना की भूमिका अहम रही थी।
पांच मर्डर केस की मिस्ट्री सुलझाई
जालौन के बघौरा में एकसाथ पांच मर्डर के केस ने पुलिस को उलझा दिया था। पुलिस अधिकारियों द्वारा पूरे जिले के सभी थानाध्यक्षों को बुलाया गया। इस दौरान डॉ. रंजना गुप्ता कालपी थाना में एसआई थीं। अधिकारियों ने कालपी थाना के थानाध्यक्ष की बजाय एसआई रंजना को बुलाया। उन्हें इस मर्डर केस को सुलझाने का स्पेशल टास्क मिला। उन्होंने किसी को निराश भी नहीं किया और कुछ ही दिनों में केस सुलझा दिया। डॉ. रंजना ने एकसाथ पांच मर्डर करने वाले को जेल भेज दिया।
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