फोटो: डीएम ऑफिस के सामने आदिवासी महिलाएं प्रदर्शन करती हुई।
झांसी. सहारिया आदिवासियों ने बुधवार को जिलाधिकारी कार्यालय पर अलग अंदाज में प्रदर्शन किया। सैकड़ों की संख्या में पहुंचे लोगों में शामिल महिलाओं ने अपने अधिकारों को बताने के लिए अलग तरीका चुना। वे ढोलक की धुन पर नाचते-गाते हुए अपने अधिकारों को बता रही थीं। लगभग एक घंटे तक एक-एक कर महिलाएंं नाचती रहीं। उनके इस प्रदर्शन को देखने के लिए वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई।
झांसी जनपद में लगभग 40 हजार की संख्या में आदिवासी हैं। वे छोटी-छोटी अस्थाई बस्ती बनाकर रहते हैं और समाज की मुख्य धारा से हटे हुए हैं। इनके पास न घर है, न वोटर कार्ड और न ही राशन कार्ड। यहां तक कि इनके बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते। इससे नाराज सहारिया जाति के लोग मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर एकता परिषद संगठन के बैनर तले प्रदर्शन किया।
रिश्तेदारों से भी होती है दिक्कत
आदिवासी समाज के नेता रामगोपाल ने बताया कि कुछ साल पहले जनपद ललितपुर के आदिवासियों को अनुसूचित जन जाति घोषित कर दिया गया। लेकिन, झांसी के आदिवासियों को अनुसूचित जाति में ही रखा गया। इससे उन्हें न सिर्फ परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि ललितपुर के रिश्तेदारों से अनुसूचित जाति में होने के कारण मतलब रखना भी बंद कर दिया है।
शिक्षा और मूलभूत सुविधाएं हैं जरूरी
इस प्रदर्शन में शामिल 12वीं पास दिनेश ने बताया कि वह पढ़ कर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन आर्थिक कारणों से उसके साथ ही अनगिनत बच्चों की पढ़ाई बंद हो चुकी है।
हर बार की तरह सिर्फ मिला आश्वासन
जिला प्रशासन ने हर बार की तरह इस बार भी आदिवासियों से ज्ञापन लिया और आश्वासन देकर चलता कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि समस्याएं सुलझाने का प्रयास करेंगे। वहीं, आदिवासियों का कहना है कि वह यह आंदोलन जारी रखेंगे।
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