सामान्य ज्ञान को मनोरंजन न समझें यह जरुरी है और ज्ञान की पहली सीढ़ी है। अमूमन जीवन में दो तरह के ज्ञान की जरूरत होती है। सामान्य ज्ञान और विशेषज्ञता की। कुछ बुद्धिजीवियों का विचार है कि एक्सपर्टाइज ज़रुरी है। यानी किसी भी एक विषय या क्षेत्र में माहिर होना जरूरी है और हर विषय का ज्ञान विशेषज्ञता के लिए ख़तरा है।
बहुत सारी चीजों के प्रति उत्साह आप की किसी एक विषय के प्रति गंभीरता को ख़त्म कर देती है, लेकिन इस धारणा के विपरीत सोच रखने वाले लोगों की भी कमी नहीं है। कई वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है, ‘जैक ऑफ आल मास्टर ऑफ नन’ यानी सब कुछ जानो किसी एक क्षेत्र विशेष में सिमट कर ही न रह जाओ। इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए एक स्मरण याद आ रहा है।
एक बार मेरा पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय विश्वनाथ प्रताप का फैजाबाद के जन मोर्चा अख़बार के कार्यालय पर भूमंडलीकरण को लेकर कार्यक्रम में जाना हुआ जब कार्यक्रम ख़त्म हुआ, तो वहां के वरिष्ठ पत्रकार सीके मिश्रा से जब हमने युवा पत्रकार की हैसियत से आशिर्वाद लेना चाहा, तो उन्होंने कहा पत्रकारिता में जैक ऑफ ऑल, मास्टर ऑफ नन के सिद्धांत का पालन करो। यही मूलमंत्र है। तब से मेरी धारणा बदल गई। हमने मान लिया सब कुछ जानना ही पत्रकारिता का पहला वसूल है और जीवन का भी। आज जीवन के किसी भी क्षेत्र में सर्वज्ञ होना जरूरी ही नहीं अनिवार्य भी है ।
विकास के लिए हर क्षेत्र की जानकारी जरूरी है और यही विकसित राष्ट्र के लिए अहम है। सामान्य ज्ञान को सिर्फ़ मनोरंजन समझना गलत होगा। यह सही है कि मनोरंजन सामान्य ज्ञान है, लेकिन सामान्य ज्ञान मनोरंजन नहीं। आज की भागती दौड़ती जिंदगी में किसी के पास समय भले ही नहीं है, लेकिन जानकारी हर क्षेत्र की है। तेज भागती युवा पीढ़ियों को तो देखो। आज वह नाच गाने से लेकर खेल कूद रहा है और
केबीसी में पैसे कमा रहा है।
हर मुद्दे पर वाजिब तर्क के साथ वार्ता को तैयार युवा सर्वगुण सम्पन्न है। अब यह धारणा गलत साबित हो रही है कि पढ़ोंगे लिखोगे तो बनोगे नवाब, खेलोगे कूदोगे होगे ख़राब। इतना ही नहीं काम करने की ललक में और जिज्ञासा ने आज तमाम बेड़ियों को तोड़ दिया है। सर्व गुणे शक्ति कलियुगे।
फोटोः प्रतीकात्मक।