लखनऊ. आंदोलन, बंद तथा हड़ताल के दौरान होने वाली हिंसा से निपटने के लिए पुलिस अब हर थाना क्षेत्र में वीडियोग्राफरों के एक सुगठित पैनल की मदद लेगी और उसके सदस्यों के बयान को सुबूत के तौर पर मान्यता दी जाएगी।
पुलिस महानिरीक्षक कानून-व्यवस्था राजकुमार विश्वकर्मा ने गुरुवार को यहां बताया कि केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजे गए आदेश में क हा गया है कि हिंसक आंदोलनों में अक्सर सरकारी तथा सार्वजनिक सम्पत्ति का नुकसान होता है। इस सिलसिले को रोकने के लिए राज्य के हर थाना क्षेत्र में विशेष वीडियोग्राफर पैनल गठित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि अब हर हिंसक आंदोलन की वीडियोग्राफी होगी और ऐसा आंदोलन या प्रदर्शन या हिंसा की आशंका होने पर संबंधित थानाध्यक्ष अपने क्षेत्र के पैनल के वीडियोग्राफर को बुलवाकर घटना की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराएंगे। विश्वकर्मा ने बताया कि वीडियोग्राफी करने वाले वीडियोग्राफर के मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान को बतौर सुबूत मान्यता दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि नए दिशानिर्देशों के तहत जुलूस, शोभायात्रा या प्रदर्शन के रास्तों के लिए शासन से इजाजत लेनी होगी और उनमें चाकू तथा डंडे लेकर जाना प्रतिबंधित होगा।