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FOLLOWING SCAM: खुद करें घपला, खुद करवाएं जांच, ये यूपी है जनाब

9 वर्ष पहले
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आगरा. मरीजों की दवाएं डीएम, कमिश्‍नर और जज द्वारा खाने के घपले की मजिस्‍ट्रेट जांच होगी। लेकिन यह जांच वही करवा रहा है, जिस पर घोटाले के आरोप लग रहे हैं। आगरा के जिलाधिकारी अजय चौहान ने सोमवार को इसकी जांच मजिस्‍ट्रेट और सहायक मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी से अलग-अलग करवाने का आदेश दिया है। महीने भर में इसकी जांच कराकर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
सूचना के अधिकार कानून के तहत “दैनिक भास्‍कर.कॉम” ने घपले के सबूत हासिल किए थे। इसके अनुसार सरकार ने वर्ष 2011 में जिला अस्‍पताल को 80 लाख रुपए दवाओं की स्‍थानीय खरीद के लिए दिए। इनमें से 29 लाख रुपए की दवाएं आगरा के डीएम, कमिश्‍नर, जज और दूसरे अफसर खा गए। बाकायदा इतनी रकम से अफसरों के लिए दवाएं खरीदी गई। डीएम आवास को 11.60 लाख, मंडलायुक्‍त आवास को 11.31, जज को 3.61 लाख रुपए की दवाएं मिली थी। यह रिकॉर्ड हैं जिला अस्‍पताल के स्‍टोर रूम का। साल भर में इतनी सारी दवाएं खा जाना अपने आप में अलबेली बात है।
इस जांच पर आगरा सामाजिक कार्यकर्ता नरेश पारस कहते हैं कि घपले की जांच सरकार को करवानी चहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। इस जांच का आदेश देने वाले वही अधिकारी हैं, जिन पर साल भर में 11.60 लाख रुपए की दवा डकारने का आरोप लगा है। जांच का काम मजिस्‍ट्रेट को दिया गया है, वह खुद डीएम के अधीन हैं। चूकि सूचना के अधिकार के तहत मिले सबूत बताते हैं कि आगरा मंडल के कमिश्‍नर आवास को भी 11.31 लाख की दवा पहुंचाई गई। इसलिए जांच इससे भी बड़े अधिकारी से जांच करवानी चाहिए।