( सुभाष शौरे ने प्रकृति और इंसान को पंच-तत्वों से जोड़ते हुए कैनवास पर उतारा है।)
चंडीगढ़। एक आर्टिस्ट रंगों से कैसे खेलता है? तस्वीर बनाते वक्त उसकी सोच क्या रहती है? अपनी पेंटिंग में वो किन-किन टेक्नीक का इस्तेमाल कर सकता है? कला से जुड़ी यह सभी चीजें गवर्नमेंट म्यूजियम आॅफ आर्ट गैलरी में लाइव देखने को मिली। सेक्टर-10 में 'पेंटिंग वर्कशॉप' चल रही है। इसे चंडीगढ़ ललित कला अकादमी की ओर से आॅर्गनाइज किया गया है। शहर के 11 आर्टिस्ट इसमें भाग ले रहे हैं।
वे चार दिन की इस वर्कशॉप में पेंटिंग बना रहे हैं। इसके साथ ही अपने एक्सपीरियंस को वर्कशॉप में पहुंचने वाले कला प्रेमियों से साझा भी कर रहे हैं। आर्टिस्ट जसकंवल ने प्रकृति की बदलती दशा को अपनी पेंटिंग में दिखाया है। अपनी आर्ट वर्क को 'डिस्ट्रैक्टिंग नेचर एंड क्रिएटिंग स्ट्रक्चर' का टाइटल दिया है।
इस बारे में बताती हैं, "हम प्रकृति की बनाई चीजों की परवाह नहीं करते। पेड़-पौधे पर रहने वाले पक्षी और वहां रहने वाले जीव जंतुओं के बारे में नहीं सोचते। इसलिए पेड़ों को काटकर कंक्रीट का जंगल बनाते जा रहे हैं। इसी पूरे क्रम को अपनी तस्वीर से दिखाने की कोशिश है। एक्रेलिक रंगों के साथ रॉटरिंग पेन को इसमें यूज किया है।
वर्कशॉप में आर्टिस्ट अलका कालरा ने ढाबा सीरीज को पेंटिंग से दिखाया है। 'रोडसाइड ढाबा' की झलक उसमें दिखती है। पेंटिंग पर अलका बताती हैं, "इस तस्वीर से एक ढाबे पर रात का सीन दिखाया है कि कैसे बर्तनों की साफ सफाई के बाद उन्हें रखा जाता है। केतली, कड़छी, तवे, पतीले, ग्लास, चम्मच और उन पर पड़ रही लाइट्स व उनकी ग्लेयर्स को दिखाया है।'
इस पेंटिंग में प्योरिटी है
आर्टिस्ट विनय वडेरा ने कमल के फूल के माध्यम से शुद्धता को आकार दिया है। उन्होंने अपनी पेंटिंग से महिला-पुरुष के हेल्दी रिश्तों को कुंडली चक्र, दिल और दिमाग से दर्शाया है। वर्कशॉप में पहुंचे पीयू के यूआईएफटी डिपार्टमेंट के बच्चों ने विनय से उनकी पेंटिंग के बारे में जाना।
फोटो: जसविंदर सिंह
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