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एक्रोपॉलिस से प्रशासन को लेने हैं 28 करोड़

8 वर्ष पहले
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चंडीगढ़। प्रशासन को विजय सिंगला की कंपनी मिराज एक्रोपॉलिस से 2८ करोड़ रुपए की वसूली करनी है। इस्टेट ऑफिस को यह रकम वर्ष 2013 तक की बकाया कन्वर्जन फीस के रूप में लेनी है। सिंगला की पेरेंट कंपनी जेपीएल इंफ्रा की ओर से इंडस्ट्रियल एरिया में 4 एकड़ जमीन पर एक्रोपॉलिस मॉल बनाया जा रहा है।

सिंगला की कंपनी ने वर्ष 2007 में कन्वर्जन करवाई थी। उसके बाद से इस्टेट ऑफिस को सिर्फ एक किस्त अदा की गई है। एक्रोपॉलिस का प्लॉट प्रशासन पहले ही रिज्यूम कर चुका है।

विजय सिंगला के करोड़ों के निवेश के दस्तावेज सीबीआई के हाथ लगे हैं। कई बेनामी संपत्तियों का भी पता लगा है, जिनकी कीमत अरबों में है। वहीं, इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट भी सिंगला और उनके साथी अजय गर्ग पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। गर्ग की कंपनी पर 16 फरवरी को आईटी रेड में टैक्स की चोरी पकड़ी गई थी। गर्ग की कंपनी ग्रीन फील्ड एंटरप्राइसेस पहले ही 10 करोड़ रुपए सरेंडर कर चुकी है।

इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट यह देखेगा कि सिंगला और गर्ग ने जो निवेश किया, क्या इसकी जानकारी डिपार्टमेंट को दी थी। नियमों के अनुसार हर बड़ी डील की जानकारी कंपनी अथवा व्यक्तिगत तौर पर डिपार्टमेंट को दी जाती है। डिपार्टमेंट सिंगला की सभी कंपनियों के टैक्स का रिकॉर्ड खंगाल रहा है। सिंगला की कंपनियों की ओर से अदा किए गए टैक्स की डिटेल एकत्रित की जा रही है। इस डिटेल को उनके निवेश से मिलाया जाएगा।

प्रशासन की खामोशी
केंद्रीय रेलमंत्री पवन कुमार बंसल के भांजे विजय सिंगला के सीबीआई के हत्थे चढऩे के बाद प्रशासन ने खामोशी अख्तियार कर रखी है। इस बारे में न इस्टेट ऑफिस के अफसर मुंह खोलने को तैयार हैं, न ही इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट के। जाहिर है कि मामला शहर के सांसद से जुड़ा है और प्रशासन के अफसर खौफ में हैं। मीडिया में कोई बयान देकर मुश्किल मोल लेना नहीं चाहते।

कन्वर्जन फीस की बकाया राशि के बारे में संपर्क करने पर इतना ही बताया गया कि प्रशासन प्लॉट रिज्यूम कर चुका है। कंपनी को इस साइट पर काम पूरी तरह से बंद करने को कहा गया है। कंपनी को पानी का 80 लाख का बिल भी चुकाना है।