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सिटी रिपोर्टर } चंडीगढ़साहित्य अकादमी द्वारा शनिवार को यूटी गेस्ट

सिटी रिपोर्टर } चंडीगढ़साहित्य अकादमी द्वारा शनिवार को यूटी गेस्ट हाउस में 16 साहित्यकारों को सम्मानित किया गया।...

Dainik Bhaskar

Apr 30, 2017, 02:00 AM IST
सिटी रिपोर्टर } चंडीगढ़साहित्य अकादमी द्वारा शनिवार को यूटी गेस्ट
सिटी रिपोर्टर } चंडीगढ़साहित्य अकादमी द्वारा शनिवार को यूटी गेस्ट हाउस में 16 साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। इन साहित्यकारों में मुख्यतया सभी अनुवादक रहे। वह अपनी भाषा में तो लिखते ही हैं, साथ ही दूसरी भाषाओं से अपनी भाषा में अनुवाद भी करते हैं। इसमें हिंदी, उर्दू, पंजाबी और अंग्रेजी के साहित्यकार शामिल है। लेखकों को होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल और जीतेंद्र यादव डायरेक्टर, टूरिज्म ने सम्मानित किया। कार्यक्रम में शहरभर के साहित्यकार शामिल हुए। अकादमी के चेयरमैन डॉ गुलजार सिंह संधू ने कहा कि हमें खुशी है कि इस बार सम्मान पाने वालों में से ज्यादातर कॉलेज, यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हैं। मैं आज ज्यादातर अनुवादक भी यहां देख रहा हूं। जैसे साहित्य के लिए साहित्यकार जरूरी है, वैसे ही अनुवादक भी।

हिंदी में विशेष सम्मान पाने वाले जय प्रकाश शर्मा ने कहा कि अकादमी से मिला ये पहला सम्मान है। मेरा लेखन सफर गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर से शुरू हुआ। जहां मैं शोध का विद्यार्थी था। उस समय हमें आचार्य हाजरी प्रसाद द्विवेदी पढ़ाते थे। मुझे उनके लेखन पर कुछ संशय होता था। मैंने इसपर एक लेख लिखा। उसे खुद आचार्य के ऑफिस में रखकर गया। आचार्य मुझे ढूंढ़ते रहे। स्टूडेंट्स ने उन्हें बताया कि मैं सनकी हूं, लेकिन आखिरकार जब मैं उनसे मिला तो उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई। दरअसल, मैंने उनके लेखन में कबीर और अन्य संत पुरुषों को समन्वय बनाने वाले की जगह आवाज उठाने वाले कहा था।

वहीं, अंग्रेजी में विशेष सम्मन प्रोफेसर राणा नैय्यर को मिला। उन्होंने कहा कि उनका संबंध पंजाब से है। शुरुआत में अंग्रेजी लेखन ही किया। पीएचडी के दौरान उन्हें लगा कि एक भाषा में बेहतर होने के लिए अपनी भाषा का ज्ञान जरूरी है। ऐसे में मैंने अंग्रेजी के साथ पंजाबी भाषा पर भी पकड़ बनाई। पीयू के अंग्रेजी डिपार्टमेंट के लिए कई नाटक लिखे। स्वर्गीय गुरदियाल सिंह के प्रसिद्ध नॉवल को अंग्रेजी में लिखने को सौभाग्य प्राप्त हुआ। इसके लिए खुद मुझे निर्देशक गुरविंदर सिंह ने प्रेरित किया।

बच्चों की दुनिया में रहते रहते लिखना सीखा

उर्दू भाषा में युवाओं को लाना चाहती हूं

उर्दूमें रेहाना परवीन को विशेष सम्मान दिया गया। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा को पंजाब यूनिवर्सिटी के इवनिंग स्टडीज में पढ़ाती हूं। उन्होंने बताया कि कुछ बच्चे सिर्फ इसी भाषा में आगे बढ़ना चाहते हैं। ये एक अच्छी शुरुआत है। मेरे ख्याल से आजकल नौजवान पीढ़ी इस भाषा में आगे बढ़ना चाहती है। जरूरत है तो सिर्फ इसे दिल से पढ़ने की। पहले पंजाब में उर्दू का इस्तेमाल और पढ़ाई होती थी। लेकिन आजकल ये गायब है।

पंजाबी में राजिंदर कौर को विशेष सम्मान दिया गया। उन्होंने कहा कि मेरी पढ़ाई चंडीगढ़ से ही हुई। उस दौरान शहर में सिर्फ सेक्टर-22 का ही सरकारी स्कूल होता था। मेरी पहली कविता सातवीं कक्षा में प्रकाशित हुई। इसके बाद पढ़ाने में व्यस्त हो गई। विभिन्न सरकारी स्कूलों में पढ़ाते हुए मैंने बच्चों के लिए लिखा। साथ ही बच्चों को पपेट्री से भी जोड़ा। जिसके लिए बाद में मुझे नेशनल अ‌वाॅर्ड भी मिला। मेरा मकसद अपनी लेखनी से बच्चों को जोड़ना है साथ ही उन्हें एक बेहतर समाज का संदेश देना है।

इन साहित्यकारों का भी हुआ सम्मान | डॉसुमिता मिश्रा(हिंदी कविता), हेमा शर्मा (हिंदी लघु कथाएं), सांव ऋचा (हिंदी अनुवाद), गुरमीत सिंह (हिंदी लेख), मनोहर शुक्ला (हिंदी बाल साहित्य), सुभाष शर्मा (पंजाबी कविता), निर्मल जसवाल राणा (पंजाबी लघु कथाएं), मलकीत बसरा (पंजाबी बाल साहित्य), रेणु बहल( उर्दू लघु कथाएं), अनुराधा भट्टाचार्य (अंग्रेजी नॉवल), सुलेखा शर्मा (अंग्रेजी लघु कथाएं) और हरसिमरन कौर (अंग्रेजी बाल साहित्य)।

चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा शनिवार को यूटी गेस्ट हाउस में हिंदी, उर्दू, पंजाबी और अंग्रेजी के साहित्यकारों को मिला सम्मान।

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16 साहित्यकारों को किया सम्मानित

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