देश का संविधान मर्यादाओं में बंधा है: प्रो. सोलंकी
मनीषी श्रीसंत
मेयर सूद
मुनिश्री विनय
संजय टंडन
बलरामजी दास
मर्यादाएंअगर जीवन में नहीं हैं तो सब कुछ खत्म हो जाएगा। जीवन से अगर धन दौलत गई तो कुछ गया, लेकिन अगर चरित्र गया तो सब कुछ गया। चरित्र भी मर्यादाओं के साथ ही जुड़ा है। देश का संविधान मर्यादाओं में बंधा है। यह बात हरियाणा, पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने सेक्टर-37 के लाॅ भवन में अणुव्रत समिति की ओर से कराए गए 152वें मर्यादा महोत्सव के अवसर पर कही। गवर्नर ने कहा कि आजकल लोगों में दिन प्रतिदिन सुंदर दिखने का क्रेज बढ़ता जा रहा है। महिलाओं के साथ-साथ पुरुष भी ब्यूटी पार्लर जाने लगे हैं। अगर मन वासनाओं से भरा हुआ है गंदा है तो सुंदरता का कोई फायदा नहीं है। इसके बाद गवर्नर ने कहा कि मनीषी श्रीसंत ने राष्ट्र को मर्यादाओं के साथ जोड़ने का सकंल्प लिया है। यह बहुत ही सराहनीय है और ऐसा कार्य सिर्फ एेसे संत मुनि ही कर सकते हैं। तेरापंथ का संविधान मर्यादाएं हैं। अगर व्यक्ति मर्यादाएं तोड़े तो जीवन सफल हो जाएगा। आचार्य भिक्षु ने एेसे संघ की स्थापना की, जो संघ आज विश्व को अपने आलोक से आलोकित कर रहा है। मर्यादा महोत्सव तेरापंथ की अनूठी देन है। मर्यादा व्यक्ति का आभूषण है। जो मर्यादा का पालन करता है वह सबसे सुंदर है। मर्यादा हमारे समाज के जीवन का प्राण है। मनुष्य के जीवन में यदि मर्यादा नहीं रहेगी तो परिवार, समाज देश नहीं चल सकेंगे। इस मौके पर दिल्ली के हनुमान सिंह सुराणा द्वारा संकलित प्रकाशित ‘उवासग्ग स्तोत्र, पदमावती स्तोत्र’ का विमोचन महामहिम ने किया। इसके अलावा महामहिम ने आनंद जैन गोबिंदगढ़, सुभाष, अशोक, मोती लाल जिंदल, रोशन लाल जिंदल, शास्त्री को सम्मानित किया।
अणुव्रत समिति की ओर से कराए 152वें मर्यादा महोत्सव में पहुंचे गवर्नर कप्तान सिंह सोलंकी।
मेयर अरुण सूद ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मनीषी श्रीसंत ने मुझे इस अवसर पर निमंत्रण दिया और इससेें भी बड़ी बात है कि मेरे वार्ड मे यह मर्यादा महोत्सव हो रहा है। मनीषी श्रीसंत का जब भी आदेश आता है वह हमारे लिए एक प्रेरणा होता है।
मुनिश्री विनय कुमार आलोक ने कहा कि देश में अनुशासनहीनता की समस्या बढ़ती जा रही है। आज बच्चा जन्म लेते ही सबसे पहले अधिकार मांगता है ना कि मर्यादा। बच्चा जब बड़ा होगा तो क्या उससे मर्यादाओं के बारे मेंे कुछ आशा कर सकते हैं।
मनीषी श्रीसंत ने कहा कि 1859 में आचार्यश्री भिक्षु ने तेरापंथ का अंतिम मर्यादा पत्र लिखा था। वह पत्र आज भी सुरक्षित है। उस पत्र पर तत्कालीन साधुओं के हस्ताक्षर भी अंकित है। इस मर्यादा पत्र को मर्यादा महोत्सव के अवसर पर सब लोगों को दिखाने की एक लंबी परंपरा है। आचार्य भिक्षु ने तेरापंथ की नींव में अनुशासन का एेसा शिलाखंड रखा, जो इस संगठन को निरंतर सुदृढ़ आधार प्रदान कर रहा है। आचार्यश्री भिक्षु के बाद के सभी आचार्यों आचार्य ने भी इस बात को गहराई से समझा है कि किसी भी सूरत मे अनुशासन कमजोर नहीं होना चाहिए।
चंडीगढ़ भाजपा अध्यक्ष संजय टंडन ने कहा कि मनीषी श्रीसंत शहरवासियों का समय-समय पर मार्गदर्शन करते रहते हैं। इसके बावजूद भी सुबह अखबार के पन्नों को पलटते हैंै तो मर्यादा सहजने की ही सबसे ज्यादा जरूरत महसूस हो रही है।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने कहा कि हर किसी कर्तव्य है कि देश के प्रति मर्यादा का पालन करे। देश को मजबूत बनाने के लिए यह जरूरी है। उन्होंने पिछले दिनों सैनिकों के शहीद होने की घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया।