सिटी रिपोर्टर } ‘यसबैंक की यस फाउंडेशन तीन साल से
सिटी रिपोर्टर } ‘यसबैंक की यस फाउंडेशन तीन साल से एक शॉर्ट फिल्म कॉम्पिटीशन करवा रही है। इसमें पार्टिसिपेंट्स को 101 घंटे का मिलता है। इसी में उन्हें शॉर्ट फिल्म बनानी होती है, एडिट करनी होती है आैर भेजनी होती है। शॉर्ट फिल्म बनेगी किस टॉपिक्स पर इसका फैसला भी यस फाउंडेशन ही करती है। इस साल के कॉम्पिटीशन में देशभर से 5 लाख एंट्रीज आईं, उनमें एक एंट्री चंडीगढ़ से भी थी, जिसे स्टूडेंट्स आैर पॉपुलर चॉयस कैटेगरी में बेस्ट फिल्म से नवाजा गया है। ‘गिफ्टेड’ नाम की इस फिल्म को शहर के लक्ष्य खेत्रपाल आैर नीतिष महाजन ने मिलकर बनाया है। हालांकि यह कॉम्पिटीशन अगस्त में हुआ था, लेकिन इसके रिजल्ट्स हालही में घोषित हुए हैं। इस प्राइज को लेकर लौटे लक्ष्य ने बताया, ‘यस बैंक के कॉम्पिटीशन के बारे में हमें जब पता चला तो सिर्फ चार दिन ही बचे थे। हमें तीन टॉपिक मिले, जिनमें से किसी एक को चुनना था। मैंने स्पेशियली एबल्ड को चुना। वो इसलिए क्योंकि बहुत पहले से मैं इस टॉपिक पर शॉर्ट फिल्म बनाना चाह रहा था, लेकिन वक्त के कमी आैर पढ़ाई के चलते इसे शुरू ही नहीं कर पाया। इस कॉम्पिटीशन के बारे में पता चलते ही मैंने इस पर काम शुुरू कर दिया। मेरे पास सिर्फ 101 घंटे का वक्त था, मैंने जी-जान लगा दी। प्रोडक्शन मेरे क्लासमेट नितीश ने संभाला। डायरेक्शन आैर एडिटिंग का काम मैंने देखा। पड़ोस के ही एक बच्चे को उस फिल्म में लीड रोल के लिए लिया। 2 दिन में फिल्म शूट की गई आैर बाकि के दो दिन उसकी एडिटिंग चली। उस फिल्म को हमने ‘गिफ्टेड’ नाम दिया, जिसकी कहानी एक स्पेशल चाइल्ड पर बुनी गई थी। वह बच्चा दौड़ सकता था आैर ही खेल सकता था, लेकिन वह एक अच्छा पेंटर था। अपनी बनाई पेंटिंग्स के जरिए वह एक दिन बहुत बड़ा अवॉर्ड पाता है। उस दिन उसे इस बात का अहसास होता है कि भले ही उसमें एक कमी है, लेकिन एक खासियत बात भी है जो उसे दूसरों से अलग बनाती है।’
...जब यह सवाल हमने लक्ष्य से किया तो उन्होंने बताया, ‘मैं सैकेंड ईयर तक तो इंजीनियर ही बनना चाहता था, पर फाइनल ईयर में आकर मुझे महसूस हुआ कि मुझे फिल्म मेकिंग में जाना चाहिए। इसलिए एक साल से मेरा पूरा ध्यान इस आैर ही है। बस अब मुझे अपनी डिग्री के पूरा होने का इंतजार है, बनना तो मुझे फिल्म मेकर ही है।
पिछलेसाल भी कॉम्पिटीशन में लिया था हिस्सा...
लक्ष्यने बताया कि पिछले साल भी उन्होंने ‘यस आई एम चेंज’ कॉम्पिटीशन में हिस्सा लिया था, पर वे जीत नहीं पाए। कहते हैं 5 लाख एंट्रीज में से सिर्फ 80 फिल्मों को चुना गया था, जिनमें से एक मेरी थी। जब यह पता चला तो बहुत खुशी हुई। मैंने स्टूडेंट कैटेगरी में पार्टिसिपेट किया था, उसमें तो मुझे प्राइज मिला ही। सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुई कि मेरी फिल्म को पॉपुलर चॉयस में अच्छे वोट्स मिले आैर इसे पॉपुलर चॉयस अवॉर्ड भी मिला। यह अवॉर्ड सेरेमनी मुंबई में हुई। हमें यह अवॉर्ड विद्या बालन, क्वीन फिल्म के डायरेक्टर विकास बहल आैर तलवार फिल्म के डारेक्टर मेघना गुलजार के हाथों मिला।
इंजीनियरिंग करके कहलाऊंगा फिल्म मेकर ही...
यस फाउंडेशन के नेशनल शॉर्ट फिल्म कॉम्पिटीशन में चंडीगढ़ के लक्ष्य आैर नितीश द्वारा बनाई फिल्म को पॉपुलर चॉयस अवॉर्ड मिला है
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चार दिन में बनाई फिल्म आैर जीता नेशनल अवॉर्ड...