सिटी रिपोर्टर } ‘विज्ञानऔर तकनीक हमें जानकारी दे सकती है
सिटी रिपोर्टर } ‘विज्ञानऔर तकनीक हमें जानकारी दे सकती है पर साहित्य आपको सपने दिखाता है,समाज को समझने की नजरिया देता है। इसलिए इसका मूल्य हमेशा अन्य विषयों से ज्यादा ही रहेगा। कुछ इन्हीं शब्दों में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने पंजाब यूनिवर्सिटी में हुए एक दिवसीय कविता सम्मेलन की शुरुआत की।
हिंदी विभाग और चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के साैजन्य से आयोजित यह सेमिनार यूनिवर्सिटी के ईवनिंग स्टडी डिपार्टमेंट के हॉल में हुआ। सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे हुकुमचंद राजपाल बोले “क्या कविता को किसी एक आंदोलन, नारा, विचारधारा तक ही सीमित किया जाए? जो चीजें हमारे लिए हमारी संवेदनाओं से जुड़ी हैं उन्हें हम किसी एक आंदोलन में कैसे देख सकते हैं। कविता आंदोलनों में सीमित रहने वाली नहीं है। कविता किसी एक स्थान, क्षेत्र, अंचल तक सीमित नहीं होती क्योंकि संघर्ष कविता के मूल में है। इनके बाद मुख्य अतिथि प्रो. एके भंडारी ने कहा कि हिंदी कविता या अन्य भाषा की कविता समाज की बात करती है।
इसके बाद विभिन्न शहरों से आए कवि और आलोचकों ने अलग अलग विषय पर अपनी बात रखी। इन कवियों और आलोचकों में डॉ. राजेंद्र गौतम, डॉ. रूप नारायण पटेल, ज्ञान प्रकाश विवेक, राजेंद्र सिंह टोकी, हिमाचल से डॉ. सायमा बानो डॉ. रामगोपाल, डॉ. राकेश, प्रो. राजिन्द्र पाल सिंह ‘जोश’, प्रो. फूलचंद मानव, प्रो. सुखदेव सिंह मिन्हास, प्रो. पंकज मालवीय, डॉ. कश्मीरी लाल, प्रो. राजेन्द्र सिंह ‘साहिल’, डॉ बलवेंद्र सिंह, प्रो. नीरजा सूद, डॉ. गुरमीत सिंह और डॉ. प्रतिभा, डॉ. रितु भनोट आदि शामिल हुए। विभाग के अध्यक्ष डॉ . अशोक सभ्रवाल ने संबोधित किया। उन्होंने इस तरह के कार्यक्रम आगे भी करने का भराेसा दिया। सेमिनार शाम पांच बजे तक चलता रहा।
} हुकुम चंद राजपाल
} सेमिनार के दौरान माधव कौिशक को सम्मानित करते विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक सभ्रवाल
‘कविता’ आंदोलनों में सीमित रहने वाली नहीं है
seminar
चंडीगढ़ साहित्य अकादमी और पीयू के हिंदी विभाग ने समकालीन हिंदी कविता पर करवाया सेमिनार।