शहर पीपुल फ्रेंडली हो: प्रो. दीपांकर
शहरोंकी डिजाइनिंग पीपुल फ्रेंडली होनी चाहिए ताकि वहां बसे लोग उस शहर से अपना जुड़ाव या रिश्ते की भावना महसूस कर सकें। कोई भी शहर बड़ी बिल्डिंग, फ्लाईओवर, हाउसिंग, सड़कों या ढांचों से नहीं बनता। शहर में लोगों को ऐसा स्पेस देना जरूरी है ताकि लोग आपस में मिलजुलकर बात करके शहर को अपना कह सकें। ये बात जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर और शिव नाडर यूनिवर्सिटी के प्रो. दीपांकर गुप्ता ने मंगलवार को पीयू में कही। पीयू के एसएस भटनागर ऑडिटोरियम में प्रो. गुप्ता का ये लेक्चर ‘पब्लिक स्पेस इन टाउन प्लानिंग: मेकिंग सिटीजन फ्रेंडली सिटी’ टॉपिक पर हुआ। प्रो. गुप्ता ने कहा कि आज के मौजूदा दौर में इस बात पर बिलकुल ध्यान नहीं पा रहे कि क्या ये शहर रहने लायक बनाया जा रहा है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करने की वजह से इस बात पर ध्यान नहीं दिया जा रहा कि क्या हम इस शहर में खुद को एक्सप्लोर कर सकते हैं। शहर में मनोरंजन के लिए क्या जगह है इसका भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है। प्रो. गुप्ता ने लोगों और शहर के बीच बनने वाले नेचुरल रिश्ते को मजबूत करने की अहमियत पर जोर दिया। शहरों की आबादी की अर्बन लिविंग सिटीजन फ्रेंडली होनी चाहिए।
प्रो. दीपांकर गुप्ता ने कहा कि यूथ के लिए जॉब्स इंतजार कर रही हैं। बशर्ते जो भी स्टूडेंट्स कर रहे हैं वो बहुत ही अच्छे तरीके से एन्जॉय करके करें। स्टूडेंट्स अगर अपने प्रयास इस तरह से करेंगे तो उनको नौकरी मिलने में कोई मुश्किल नहीं होगी।
एक स्टूडेंट के पूछे सवाल पर प्रो. दीपांकर गुप्ता ने कहा कि अकेले ऑड-ईवन में प्रदूषण दूर नहीं किया जा सकता। इस सिस्टम से ट्रैफिक कम करने के साथ कुछ हद तक प्रदूषण दूर किया जा सकता है लेकिन सच में प्रदूषण को कम करने के लिए सरकारों को और ज्यादा साहस दिखाना हाेगा। प्रदूषण फैलाने वाले खराब डीजल, रोड साइड डस्ट जैसे कंपोनेंट को कंट्रोल करना जरूरी है।
प्रो. दीपांकर गुप्ता