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बदलाव की योजनाओं से ऐसे बदल रहा है देश

5 वर्ष पहले
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परिवर्तनहीप्रगति और किसी समाज या राष्ट्र की आर्थिक वृद्धि की कुंजी है। सुधार के कदमों की शृंखला से देश को तरक्की की राह पर तेजी से बढ़ाने के अथक प्रयास ही प्रधानमंत्री मोदी की एनडीए सरकार का 2014 में सत्ता में आने के बाद से मूलमंत्र रहा है। बायोमेट्रिक हाजिरी प्रणाली से लेकर पहली बार अज्ञात रहकर काम करने वालों का पद्‌म पुरस्कारों के लिए चयन या राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाने तक प्रधानमंत्री लोगों की मानसिकता और संस्थाओं की कार्यप्रणाली में रूपांतरण लाने की कोशिश कर रहे हैं। यह कोशिश दशकों पुरानी पृथक रेलवे बजट पेश करने की परम्परा की बजाय एक ही व्यापक बजट पेश करने में भी झलकी है। यथास्थितिवादी परिवर्तन से घबराते हैं, किंतु दूरदर्शी साहस संकल्प के साथ राष्ट्र के व्यापक हित में परिवर्तन लाने वाले फैसले लेने में सक्षम होते हैं, क्योंकि उनके कोई स्वार्थ प्रेरित इरादे नहीं होते हैं।

पुराने बड़े नोटों को बंद करने और देश की सफाई कर रहे अन्य बदलाव प्रधानमंत्री के ध्येय वाक्य, ‘रिफॉर्म (सुधार), परफॉर्म (अमल) एंड ट्रान्सफॉर्म (रूपांतरण)’ के अनुरूप ही हैं। बेहतर भविष्य के लिए भारत के रूपांतरण का इरादा शुरुआत के फैसले में ही दिखाई दिया था, जिसके तहत योजना आयोग को खत्म करके नीति आयोग गठित किया गया था, जो नेशनल इंस्टीट्यूशन ऑफ ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया का ही संक्षिप्त रूप है। संचार स्पेक्ट्रम और कोयला खनन के अधिकारों की पारदर्शी नीलामी भी ऐसी ही पहल थी, जिससे सरकार के खजाने में लाखों करोड़ रुपए आए। यह यूपीए सरकार के दौरान घोटाले से दागदार नीलामी प्रक्रिया के एकदम उलट था। राज्यों को 42 फीसदी स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को 5 फीसदी फंड्स देने की 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों को यथावत स्वीकार करना सहयोगात्मक संघवाद और टीम इंडिया की भावना में मोदीजी के दृढ़-विश्वास का उदाहरण है।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसद में दिए अभिभाषण में कहा था कि गुरु गोबिंद सिंह और संत-दार्शनिक रामानुजाचार्य ने सामाजिक रूपांतरण अौर सुधार का जो मार्ग दिखाया है, वह सबके लिए दीपस्तंभ की तरह है और मेरी सरकार के लिए प्रेरणा। सरकार ने पहले दिन से ही ‘गांव, गरीब, किसान, युवा, महिला और मजदूरों’ के कल्याण को प्राथमिकता दी है। वित्तीय समावेश के लिए जन-धन और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने जमीनी स्तर पर बहुत बड़ा प्रभाव डाला है। जन-धन के तहत 26 करोड़ की असाधारण संख्या में लोगों के बैंक खाते खोले गए हैं और मुद्रा योजना के तहत छोटे उद्यमियों को 2 लाख करोड़ रुपए मुहैया कराए हैं, जिसमें से 70 फीसदी महिला उद्यमियों को मिला है। बहुत बार सुना हुआ जुमला है, स्वच्छता ईश्वर के नजदीक का होने का अहसास है। दुर्भाग्य से जब तक सरकार ने सोच बदलने वाला ‘स्वच्छ भारत मिशन’ शुरू नहीं किया तब तक किसी सरकार ने स्वच्छता के महत्वपूर्ण पहलू पर ध्यान नहीं दिया। यह अब एक तरह से जन-आंदोलन हो चुका है। नतीजा यह है कि 450 से ज्यादा शहरों, 1.40 लाख गांवों, 77 जिलों और तीन राज्यों ने खुद को ‘खुले में टॉयलेट जाने’ के अभिशाप से मुक्त घोषित कर दिया है। लोगों के रवैये में उल्लेखनीय बदलाव से यह संभव हुआ है। मिशन के तहत 3 करोड़ से ज्यादा टॉयलेट निर्मित हुए हैं।

‘गिव इट अप’ अभियान भी लोगों का रवैया बदलने पर केंद्रित पहल है। संपन्न परिवारों से की गई प्रधानमंत्री की अपील के बाद 1.20 करोड़ उपभोक्ताओं ने रसोई गैस की सब्सिडी त्याग दी है। जन धन, आधार-मोबाइल के जरिये सीधे खातों में सब्सिडी राशि पहुंचाने की योजना ने 36,000 करोड़ रुपए का रिसाव रोका गया है। इसी तरह रसोई गैस सब्सिडी पहुंचाने की दुनिया की सबसे बड़ी नकद हस्तांतरण की ‘पहल’ योजना से पिछले दो वर्षों में 21,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है। खुशी की बात है कि चंडीगढ़ और अन्य आठ जिले केरोसिन मुक्त घोषित हुए हैं। 2022 तक किसानों की अामदनी दोगुनी करने किसानों की आत्महत्याएं रोकने के सरकार के विज़न के हिस्से के रूप में किसानों पर केंद्रित योजनाएं जैसे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाएं बहुत अच्छे नतीजे दे रही हैं। किसानों को आसान ऋण उपलब्ध कराने के लिए नाबार्ड का फंड दोगुना कर 41,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। दलहन पर न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर और 8 लाख टन दलहन खरीदकर उनकी कीमतें काबू में लाई गई हैं।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ बिगड़ते लैंगिक अनुपात की समस्या पर केंद्रित रूपांतरकारी पहल है। प्रधानमंत्री सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 11,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि एक करोड़ से ज्यादा खातों में जमा की गई है। यह योजना बालिकाओं का सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करती है। गर्भवती महिलाओं के लिए मातृत्व अवकाश 12 हफ्ते से बढ़ाकर 26 हफ्ते किया गया है। भ्रष्टाचार रोकने और काले धन को बाहर लाने के लिए नोटबंदी का बदलाव लाने वाला कदम उठाया गया। इससे सारा पैसा बैंकों में गया है और बैंकोें में नकदी की इस उपलब्धता के कारण ब्याज दरें कम होकर अधिक लोगों को ऋण उपलब्ध हो रहा है। रूपांतरण की इस कथा में ‘भीम’ (भारत इंटरफेस फॉर मनी) की जबर्दस्त लोकप्रियता सफलता की कई कहानियों मे से एक है।

रूपांतरण लाने वाली योजनाओं में एक राष्ट्र, एक बाजार के लिए जीएसटी, दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना (18 हजार विद्युतहीन गांवों में से 11 हजार का विद्युतीकरण), किफायती मूल्य पर 20 करोड़ एलईडी बल्ब की सप्लाई (इससे उपभोक्ता के 10,000 करोड़ रुपए बचे), बच्चों के टीकाकरण की इंद्रधनुष योजना, अजा, जजा और महिला उद्यमियों के लिए स्टैंड अप इंडिया योजना, 1100 पुराने कानूनों का खात्मा 400 और निकट भविष्य में खत्म किए जाएंगे, न्यूनतम 1000 रुपए की मासिक पेंशन।

जहां ऐसे प्रगतिशील और क्रांतिकारी कदमों की सूची व्यापक है, वहीं यह कहना पर्याप्त होगा कि एनडीए सरकार ‘पुनरुत्थान और स्वच्छ भारत’ के रूपांतरकारी मार्ग से विचलित नहीं होगी। इसके लिए वह हर क्षेत्र में रूपांतरकारी कदम उठाएगी। फिर नकारात्मक सोच वाले और यथास्थितिवादी लोग कितनी ही बाधाएं क्यों डालें। (येलेखक के अपने विचार हैं।)

संदर्भ... राजनीतिकचंदे में पारदर्शिता लाने जैसी रूपांतरित करने वाली योजनाएं और उनका समाज पर दूरगामी प्रभाव

वेंकैया नायडू

केंद्रीयसूचना प्रसारण और शहरी आवास मंत्री

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