• Hindi News
  • National
  • सिंडीकेट की मीटिंग में फैसला, पीयू बंद लिफाफे में चांसलर को भेजेगी रिपोर्ट

सिंडीकेट की मीटिंग में फैसला, पीयू बंद लिफाफे में चांसलर को भेजेगी रिपोर्ट

4 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
{ये है मामला...

पंजाबयूनिवर्सिटी कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हैरासमेंट (पीयूकैश) वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर पर महिला प्रोफेसर एवं सीनेटर द्वारा लगाए गए आरोप की जांच करेगी और इसकी रिपोर्ट बंद लिफाफे में चांसलर को भेज दी जाएगी। ये फैसला शनिवार को हुई स्पेशल सिंडीकेट की मीटिंग में किया गया है। सिंडीकेट मेंबर्स का कहना था कि पूर्व चांसलर के ओएसडी अंशुमन गौड़ और रजिस्ट्रार कर्नल गुलजीत सिंह चढ्ढा ने अपना रुटीन का काम किया है कि कोई कॉन्सपिरेसी। यूनिवर्सिटी को लेकर कानूनी प्रशासनिक लेटर्स का आदान-प्रदान करना उनकी जिम्मेदारी है। जनवरी 2017 में गौड़ ने लेटर जारी किया था कि पीयूकैश ही इस मामले की जांच कर सकती है। लेटर को महिला सीनेटर एवं प्रोफेसर द्वारा ‘फ्रॉड’ कहे जाने की भी मीटिंग में निंदा की। महिला प्रोफेसर ने पूर्व चांसलर प्रो. हामिद अंसारी के ओएसडी अंशुमान गौड़ पर पद के दुरुपयोग और रजिस्ट्रार की मिलीभगत से लेटर जारी करने वाली शिकायत में सवाल उठाया है कि यदि सेक्रेटरी टू वाइस प्रेसिडेंट ने गौड़ को इस बारे में ‘वर्बल ऑर्डर’ दिए थे तो गौड़ ने जल्द फाइल पेश करके ‘कन्फर्मेशन’ क्यों नहीं लिया। आमतौर पर सरकारी सिस्टम में यही होता कि मातहत अपने अधिकारी के वर्बल ऑर्डर को फॉलो करता है, लेकिन फाइल पर पहले उनकी लिखित कन्फर्मेशन ले लेता है। उनका कहना है कि इस बारे में डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग की आेर से इस बारे में स्पष्ट गाइडलाइंस हैं जिनको फॉलाे नहीं किया गया। उन्होंने पूर्व चांसलर के ओएसडी अंशुमन गौड़ और रजिस्ट्रार कर्नल चड्ढा की सीबीआई इंक्वायरी कराए जाने की मांग उठाई थी।

2 साल पहले महिला प्रोफेसर वीसी प्रो. अरुण ग्रोवर को दूसरी टर्म मिलने की बधाई देने गई थी। वहां दोनों के बीच विवाद हुआ। इसकी शिकायत उन्होंने चांसलर से की। दूसरी शिकायत में उन्होंने सेक्सुअल हैरासमेंट का आरोप लगाया। वीसी ने जब मामले की जांच पीयूकैश को करने के लिए कहा तो शिकायतकर्ता ने ये कहते हुए कमेटी के सामने पेश होने से मना कर दिया कि आरोपी द्वारा ही बनाई गई कमेटी में सभी उसके मातहत हैं। उन्होंने चांसलर से इस बारे में स्वयं कमेटी बनाने को कहा था। मामला करीब दो साल से पेंडिंग है। सीनेट ने इसे लेकर स्पेशल कमेटी भी बनाई लेकिन चांसलर ऑफिस से लेटर आया कि पीयूकैश ही इसकी जांच करे।

महिला प्रोफेसर ने मौजूदा चांसलर उपराष्ट्रपति डॉ हामिद अंसारी को लेटर लिखा है कि ये चिट्‌ठी संदिग्ध है। उन्होंने ‘राइट टू इनफॉर्मेशन’ के तहत जानकारी मांगी थी। लंबे समय तक उनको जानकारी नहीं दी गई तो उन्होंने सेंट्रल इनफॉर्मेशन कमीशन में अपील किया था। इसी सुनवाई के दौरान ही वाइस प्रेसिडेंट ऑफिस से उनकाे जानकारी मिली कि इस बारे में कोई ‘नोटिंग सेक्रेटेरिएट के पास नहीं है। शायद गौड़ ने सेक्रेटरी के वर्बल ऑर्डर पर लेटर जारी कर दी। लेकिन जब सिंडीकेट में सीआईसी के आदेश आए तो उसमें शायद शब्द का जिक्र नहीं है। उसमें स्पष्ट कहा गया है कि वर्बल ऑर्डर पर ही लेटर जारी किया गया। सिंडीकेट मेंबर्स का कहना था कि इस लेटर को फ्रॉड कहे जाने की निंदा की जाती है। यूं भी ठीक ऐसा ही लेटर जून 2017 को भी आया है जिसमें स्पष्ट लिखा गया है कि पीयूकैश ने ही इस मामले की इंक्वायरी करनी है।

{लेटर को ‘फ्रॉड’ कहने की सिंडीकेट ने की निंदा

खबरें और भी हैं...