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94.3 माय एफफम के कैंपेन ‘मांगो हक से’ को मिल रहा है ट्राईसिटी में हज़ारों लोगों का ढेर सारा समर्थन

4 वर्ष पहले
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}कैंपेन को सपोर्ट करने की मुहिम

}प्राची ने किया सपोर्ट

}परिवार से करें बात

हमारेदेश में लड़कियों के पीरियड्स और सेनेटरी नैपकिंस हमेशा से एक टैबू ही बना रहा है। लड़कियों की खुद की फैमिलीज़ कभी लड़कियों से इस बारे में बात ही नहीं करती थी। क्यों हमारे देश में ये नेचुरल प्रोसेस एक टैबू ही बना हुआ है? क्यों हम एक प्रगतिशील सोच नहीं रखते इस दिशा में? यही सवालों के जवाब ढूंढने के लिए माय एफएम ने ट्राईसिटी में 3 मई, 2017 से एक महीम शुरू की है, जिसका नाम ‘मुहीम मांगो हक से’ है।

इस मुहीम के जरीये माय एफफम प्रोत्साहित कर रहा है, लड़कियों और महिलाओं को सेनेटरी के इस्तेमाल करने के लिए और सेनेटरी नैपकिन्स को खरीदते हुए इनसे झिझकने के लिए। इस मुहीम के अंतर्गत ट्राईसिटी में माॅय एफफम गीत लोगों से रोज़ चर्चा कर रही है की, क्यों महिलाओं के मासिक धर्म और सेनेटरी नैपकिन्स एक टैबू ही बनकर रह गया है? कहां से ये टैबू की शुरुअात हुई? किसने ये टैबू शुरू किया?

माय एफफम गीत पर ये मुद्दा सिर्फ माॅय एफफम पर उठाया जा रहा है बल्कि वह ट्राईसिटी में जगह-जगह जाके लोगों से इस पर आमने-सामने चर्चा भी की जा रही है और साथ ही इन चर्चाओं को फेसबुक पर लाइव करके लोगों तक पहुंचाया भी जा रहा है। अभी तक फेसबुक लाइव विडियोज को 2000 से भी ज़्यादा लोगों ने देखा है। माॅय एफफम गीत लोगों को इस मुहीम से जुड़ने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है। अपना एक फोटो सेनेटरी नैपकिन के साथ फेसबुक पर शेयर करने के लिए भी गुजारिश कर रही है। शुरुआत में लोग हिचकिचाए जरुर हैं लेकिन धीरे-धीरे लोग इस मुहीम से जुड़ने लगे और अभी तक 200 से ज़्यादा लोगों ने इस कैंपेन को सपोर्ट करते हुए अपने फोटोज शेयर किये हैं।

मांगो हक़ से कैंपेन इस हफ्ते भी ट्राईसिटी में चलेगा और आज से सुखना लेक पर माय एफफम की लाल दीवार भी लगेगी, जहां पर मौजूद होंगी आरजे गीत, लोगों से इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए। तो आप आज ही सुखना लेक आएं और इस मुहीम को जरुर सपोर्ट करें।

अर्जन फिल्म की हेरोइन प्राची तेहलान ने कहा- मासिक धर्म महिलाओं की ज़िन्दगी का एक हिसा है इसमें शर्म की क्या बात है, मायएफफम काकैंपेन को मैं सपोर्ट करती हूं, मांगो हक़ से।

यही नहीं सिटको एमडी कविता सिंह ने भी माॅय एफफम की इस मुहीम को सराहा है और उन्होंने कहा है कि इस टैबू के लिए कहीं कहीं खुद महिलाएं भी ज़िम्मेदार हैं, अगर वो इस बारे में अपने परिवार से बात करेंगी तभी ये टैबू टूटेगा।

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