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156 करोड़ की ग्रांट, 100 करोड़ का घोटाला, नाइपर डायरेक्टर-रजिस्ट्रार सीबीआई हिरासत में

5 वर्ष पहले
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vineet.rana@dbcorp.in

नाइपरमें सरकारी ग्रांट में हुए जिस घोटाले का भास्कर तीन साल पहले खुलासा कर चुका है, उस पर सीबीआई ने मोहर लगा दी। सीबीआई ने शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) में रेड की। नाइपर डायरेक्टर डॉ. केके भूटानी को साथ लेते हुए उनके घर ऑफिस में छापेमारी की। इंस्टीट्यूट के रजिस्ट्रार को सीबीआई की टीम पूछताछ के लिए अपने साथ चंडीगढ़ आॅफिस ले गई।

नाइपर के डायरेक्टर डॉ. केके भूटानी के खिलाफ कॉर्पोरेशन एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। सूत्रों के अनुसार उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। रजिस्ट्रार एंड सीवीओ विंग कमांडर पीजेपी सिंह वड़ैच, डिप्टी रजिस्ट्रार राजेश मौजा, पूर्व रजिस्ट्रार भूपिंदर सिंह, फाइनेंस एंड अकाउंट ऑफिसर एम जोश, पूर्व सेक्शन ऑॅफिसर आॅडिट हरदीप सिंह, प्रोफेसर एंड डीन एके चक्रवर्ती, प्रोफेसर सरनजीत सिंह, पूर्व डायरेक्टर डॉ. पी रामाराव, पुणे की एक प्राइवेट कंपनी कुछ अज्ञात तथा मिनिस्ट्री ऑफ कैमिकल्स एंड फर्टिलाइजर आॅफिशियल के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इन पर आईपीसी की धारा 120बी, 420, 409,467, 471 अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। सीबीआई करीब 50 प्रोजेक्ट्स से जुड़े दस्तावेजों की फाइलें अपने साथ ले गई। इनमें वह प्रोजेक्ट्स शामिल हैं, जिनके नाम पर करोड़ों रुपए का खेल खेला गया।

{ऑडिटोरियम बनाया जाना था। 5 करोड़ रुपए मंजूर हुए, लेकिन कहां है किसी को नहीं पता?

{आॅडिटोरियम के लिए एक करोड़ का फर्नीचर, 1.80 करोड़ के एसी लगे दिखाए गए। ऑडिटोरियम ही नहीं बना तो फर्नीचर एसी कहां लगे?

{फार्मा आरएंडडी (एमबीए) के लिए 1.75 और 1.60 करोड़ मंजूर हुए, आज तक स्थापित नहीं किया?

{इंटलएक्च्युटल प्रॉपर्टी राइट्स डिपार्टमेंट बनाने के लिए सवा दो करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए। लेकिन नहीं बनाया गया।

सीबीआई द्वारा जारी एक प्रेस रिलीज में लिखा गया है कि नाइपर के डायरेक्टर अन्य आॅफिशियल स्टाफ सरकार को चूना लगा रहे हैं। एक पुणे की फर्म भी शामिल है। नाइपर आॅफिशियल, कई प्राइवेट लोग मिनिस्ट्री ऑफ कैमिकल्स एंड फर्टिलाइजर के कुछ ऑफिसर के साथ मिलकर यह खेल खेल चुके हैं। इसके मद्देनजर देशभर में चंडीगढ़, मोहाली, बठिंडा, कुरुक्षेत्र, पुणे, त्रिवेंद्रमपुरम, न्यू दिल्ली भोपाल में रेड जारी थी। रेड में नाइपर डायरेक्टर के घर से 13 लाख की एफडीज, 25 लाख बैंक बैलेंस, 50 लाख की प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले। डेढ़ करोड़ रुपए की लागत की प्रॉपर्टी के दस्तावेज नाइपर रजिस्ट्रार और सीवीओ के घर से मिले हैं। रेड सीबीआई की टीम सुबह साढ़े 7 बजे दो गाड़ियों में नाइपर कैंपस में रेड पर आई।

{डायरेक्टर भूटानी समेत 7 पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के तहत केस

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2012 में नाइपर के प्रोफेसर डॉ. निरंजन रॉय ने नाइपर में करोड़ों रुपए के घपले के खिलाफ आवाज उठाई थी। इस कारण उनको नाइपर से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उनकी जगह डॉ. परीक्षित बंसल ने ली तो उनको यह कहकर बाहर कर दिया गया कि उनकी टर्म खत्म हो चुकी है। इस घपले के बारे में डॉ. निरंजन रॉय सीबीआई को शिकायत दे चुके थे। वहीं, प्रोफेसर डॉ. नीरज कुमार ने भी शिकायतें की। लेकिन सीबीआई ने उनकी शिकायत को खारिज कर दिया था। डॉ. बंसल हाईकोर्ट गए तो 2014 में कोर्ट ने सीबीआई को कार्रवाई करने के लिए कहा। यह मामला सीबीआई इंवेस्टिगेट कर रही थी। इसी के मद्देनजर शुक्रवार को यह रेड डाली गई।

मौके पर मौजूद कुछ स्टूडेंट्स ने बताया कि घोटाले का मामला प्रोफेसर निरंजन रॉय ने उठाया था। सेंटर की तरफ से 11वीं पंचवर्षीय योजना (वर्ष 2007-12) के तहत 156 करोड़ रुपए की ग्रांट आई थी, जिसमें सब के पैसे निर्धारित थे कि किस प्रोजेक्ट पर कितने पैसे खर्चे जाने हैं। पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर करने वाले नाइपर के पूर्व प्रोफेसर डॉ. परीक्षित बंसल ने बताया कि इन कुल 156 करोड़ रुपए में से मात्र 56 करोड़ ही नाइपर निर्धारित प्रोजेक्ट्स पर खर्चे गए। बाकी पैसे का मिसयूज किया गया।

करोड़

61.89

19 नए प्रोजेक्ट के लिए

करोड़

95

पहले ही जारी थे 22 प्रोजेक्ट्स के लिए

प्रोफेसर सरनजीत सिंह

पी रामाराव

डीन एके चक्रवर्ती

डाॅ. केके भूटानी

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