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आंखें नहीं, लेकिन मुझे मंजिल पता है...

5 वर्ष पहले
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चंडीगढ़ | वेआंखों से देख नहीं सकते, लेकिन किसी से कम नहीं हैं। हर रास्ते पर दम से चल सकते हैं, क्योंकि उनके मंजिल का पता है। यह बात सटीक बैठती है उन तमाम ब्लाइंड बच्चों पर, जिन्होंने रविवार कार चलाने वालों को रास्ता दिखाया। एनजीओ राउंड टेबल इंडिया के चंडीगढ़ चैप्टर ने रविवार को इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड, सेक्टर-26 के फंड जुटाने के लिए एक कार रैली-‘ब्लाइंड मैन रैली’ कराई। डायरेक्टर पब्लिक इंस्ट्रक्शन स्कूल्स रुबिन्दरजीत सिंह बरार ने झंडी दिखा कर रैली को रवाना किया। इसमें पहला स्थान पर इंस्टीट्यूट फॉर ब्लाइंड की समिता और सुमन को मिला।

बीएमआर के संयोजक अतुल लूथर ने कहा कि कई जगह पर सरप्राइज चैक प्वाइंट्स थे जो कि दिए गए निर्देशों के विपरीत ओवर स्पीडिंग या अंडर स्पीडिंग कर रहे थे, उन्हें पैनल्टी प्वाइंट्स भी दिए गए।’ सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कारों की औसत गति को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा ही बनाए रखना था। सबसे कम पैनल्टी प्वाइंट्स पाने वाले तीन प्रतिभागियों को विजेता घोषित किया गया और उन्हें और उनके नेविगेटर्स को नकद पुरस्कार प्रदान किए गए। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए।

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