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बुजुर्ग बोली- मुझे इंसाफ मिले लेकिन इसे सजा हो

5 वर्ष पहले
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मुझे इंसाफ चाहिए- उम्मीद है यहां मेरी गुहार सुनी जाएगी, लेकिन मैं नहीं चाहूंगी कि मेरी वजह से उसे सजा हो। नेशनल लोक अदालत में एक बुजुर्ग अपने भतीजे से उधारी के 7 लाख रुपए लेने का केस लेकर आई। उसका भतीजा उसे रुपए नहीं लौटा रहा था। भतीजे ने जो चेक के जरिए रकम की अदायगी की। लेकिन बैंक में पर्याप्त पैसा होने के चलते यह चेक बाउंस हो गए। मामला निचली कोर्ट पहुंचा। निचली कोर्ट ने चेक बाउंस के मामले में भतीजे को 6 महीने की कैद कर दी। मामला आपसी सहमति से सेटल के लिए लोक अदालत में पहुंचा। यहां पर बुजुर्ग ने कहा कि मैं नहीं चाहती कि मेरे भतीजे को सजा हो। मुझे पता है कि इसके पास पैसे नहीं है, लेकिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार मेरे पैसे लौटा दे। इस पर सेशंस कोर्ट ने पांच लाख रुपए में मामला रजामंदी से सुलझाने की कोशिश की। बुजुर्ग महिला का बेटा इसके लिए सहमत नहीं था। बुजुर्ग के बयान पर मामला पांच लाख में सेटल कर दिया। इसमें भतीजे को कहा गया कि एक लाख रुपए वह शुरू में देगा। इसके बाद 50 हजार रुपए हर तीन महीने बाद देगा। तीन किश्तेंं पूरी होने के बाद उस पर निचली अदालत में चल रही सजा भी खत्म हो जाएगी। दोनों परिवारों के बीच लंबे अर्से से चला रहा विवाद भी खत्म हो गया और रिश्ते की दूरियों भी कम हो गईं। नेशनल लोक अदालत में 13,391 केसों का निपटारा हुआ।

28लाख का बैंक लोन 6 लाख में सेटल: चंडीगढ़के एक युवक ने पंजाब एंड सिंध बैंक से 1997 में कारोबार के लिए 3 लाख रुपए लोन लिया था। इसके बदले में बैंक ने उसकी डेढ़ एकड़ जमीन गिरवी रखी थी। लेकिन कारोबार नहीं चला और युवक का पैसा डूब गया। बैंक किश्ते अदा करने की तारीख से अब तक उस पर 28 लाख रुपए लोन आउट स्टेंडिंग दिखाई मामला निचली अदालत में पहुंचा, जहां पर टेक्निकल ग्राउंड पर कोर्ट ने युवक को बेकसूर मानते हुए उसे बरी कर दिया। बैंक ने मामले युवक के खिलाफ लोक अदालत में अपील की। इस पर एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एवं सेशंस जज नाजर सिंह की अदालत ने दोनों पक्षों की सहमति से 28 लाख का लोन 6 लाख रुपए में सेटल कर दिया। बैंक को उसका पैसा और युवक को गिरवी रखी जमीन मिल गई।

पांचसाल से किरायेदार ने नहीं दिया बूथ का किराया: सेक्टर47 डी के कंवर नोनिहाल सिंह का एक बूथ किराये पर चढ़ा हुआ था। किराये दार ने 5 साल से किराया नहीं दिया, जो 7.11 लाख रुपए बनता था। मामला एक साल से अदालत में विचाराधीन था। लोक अदालत में सहमति से किरायेदार बूथ सोमवार को खाली करने को तैयार हो गया।

{भतीजा नहीं लौटा रहा था उधार लिए 7 लाख रुपए

एक मस्जिद के रखरखाव को लेकर बनी दो अलग-अलग कार्यकारिणी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। दो प्रधानों ने अलग-अलग कार्यकारिणी गठित की हुई थी। विवाद लोक अदालत में पहुंचा। यहां पर जेएमआईसी मानव की अदालत ने दोनों पक्षों की काउंसिलिंग की और दोनों पक्षों ने प्रेयर का समय अलग-अलग कर लिया और विवाद सुलझ गया। इसके अलावा एक कॉमन इलेक्टेड बॉडी का भी गठन कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइंस के तहत चंडीगढ़ स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी ने रेप केस में 4 पीड़िताओं को तीन-तीन लाख रुपए मुआवजा दिया। वहीं बापूधाम स्थित काली बाड़ी मंदिर के नजदीक गटर में मारे गए तीन मजदूरों के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपए मुआवजा दिया गया। मुआवजे की रकम अदा करने के लिए डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेस अथॉरिटी ने चंडीगढ़ के डीसी को इस संबंध में आदेश पारित कर दिए हैं। चंडीगढ़ प्रशासन पीड़िताओं और मजदूरों के परिजनों को मुआवजा देगा। नेशनल लोक अदालत सेशंस जज एसके अग्रवाल और चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट अनुभव शर्मा के नेतृत्व में किया गया। इस दौरान सेशंस जज और सीजेएम ने सभी कोर्ट्स में जाकर मामलों का निबटारा किया।

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