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ट्राईसिटी में रात 10:35 पर महसूस किए भूकंप के झटके, लोग घरों से बाहर निकले

5 वर्ष पहले
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दुनियाभर में 400 से 500 ताे उत्तर भारत में 3-4 भूकंप रोज आते हैं

मनोज अपरेजा/अधीर रोहाल | चंडीगढ़

दुनियाभरमें रोजाना 400 से 500 आते हैं। हिंदुस्तान के उत्तर भारत में रोज तीन की तीव्रता से कम वाले कम से कम औसतन तीन झटके आते हैं। कांगड़ा में ऐसे झटके रोजाना औसतन तीन से चार आते हैं, लेकिन महसूस नहीं होते। भूगर्भ वैज्ञानिकों की मानें तो भूकंप इतनी तेजी से अपना असर दिखाता है कि जमीन के नीचे टूटी प्लेटों के बाद ऊपरी सतह पर हुई हलचल तीन किलोमीटर प्रति सेकंड से आगे बढ़ती जाती हैं। मान लीजिए चंडीगढ़ भूकंप का एपिक सेंटर था तो वहां से 560 किलोमीटर के (एरियर व्यू चाराें तरफ) पहुंचने में तीन मिनट से भी कम समय लगेगा। सोमवार रात आया भूकंप जमीन के अंदर 20 किलोमीटर नीचे हुई हलचल का नतीजा है। जमीन में जितनी नजदीक हलचल होगी, उसका नुकसान ज्यादा होगा।

भूकंप के लिहाज से देश पांच हिस्सों में बंटा है। उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्से ज्यादा संवेदनशील हैं। सबसे संवेदनशील उत्तराखंड और हिमाचल के कांगड़ा और फिर जम्मू कश्मीर के निचले हिस्से हैं। ये सबसे संवेदनशील जोन 5 में आते हैं। चंडीगढ़ जोन-5 के बिल्कुल साथ सटा है। जोन-4 में होने के कारण इंडियन प्लेट में हुई हलचल के सबसे तीखे झटके चंडीगढ़ में सोमवार को भी महसूस किए गए। हालांकि भूगर्भ वैज्ञानिक मानते हैं कि चंडीगढ़ के आर्किटेक्चर के मुताबिक डिजाइन हुई तीन मंजिला इमारतों में भूकंप सहने की क्षमता है।

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