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रोहतक के एडिशनल सेशन जज का फैसला

5 वर्ष पहले
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हाईकोर्ट ने पूछा; झूठे केस में फंसाने वाले पांच पुलिसकर्मियों पर अफसर मेहरबान क्यों ‌?

शमशेर ने शेरा को बेकसूर बताते हुए पुलिस पर उसे फंसाने का आरोप लगाया था। विजिलेंस ने शमशेर सिंह को मनोज से संपर्क करने की बात कही। तय हुआ कि दोनों सेक्टर-तीन में बैंक के सामने मिलते हैं। वहां विजिलेंस ने छापा मारकर एएसआई सतीश, उसके चचेरे भाई मनोज को 3 लाख रुपए रिश्वत लेते दबोचा था। विजिलेंस ने एसआई रतन सिंह एएसआई संजीव को भी आरोपी बनाया था।

एसआईएएसआई का नाम निकालकर दो के खिलाफ दिया था चालान: जांचमें निर्दोष पाए जाने पर रतन सिंह संजीव का नाम निकालकर विजिलेंस ने एएसआई सतीश मनोज के खिलाफ चालान पेश किया। सतीश की तरफ से पैरवी करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता जितेंद्र हुड्डा ने बताया कि शिकायतकर्ता ने अपने बयान बदलकर आरोपियों के पक्ष में गवाही दी। उसने कहा था कि एएसआई सतीश ने उससे पैसे नहीं मांगे। सिर्फ सतीश के जरिये पैसे दिए गए।

शिकायतकर्ता के गवाही बदलने से छूटा रिश्वत का आरोपी एएसआई, कोर्ट ने कहा- बयान बदलने पर हो कार्रवाई

रेलवेग्रुप-डी का पेपर आउट करने के आरोपी की धारा हल्की करने की एवज में 3 लाख रुपए रिश्वत के साथ रंगे हाथों पकड़े गए सीआईए के एएसआई उसके चचेरे भाई को एडिशनल सेशन जज अश्वनी गोयल की कोर्ट ने सोमवार को बरी कर दिया। वहीं, गवाही बदलने को सख्ती से लेते हुए कोर्ट ने शिकायतकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। रंगेहाथ रिश्वत लेने के बावजूद कोर्ट से दो माह के अंदर ही तीन मामलों में आरोपी बरी हो चुके हैं।

4 दिसंबर 2014 को रेलवे ग्रुप-डी के लिए परीक्षा थी, लेकिन पेपर आउट होने का पता चला। पेपर शुरू होने पर पता चला था कि अासन गांव से आंसर-की दी जाएंगी। सीआईए-तीन खुफिया शाखा ने मिलकर गांव आसन में दबिश देकर विशाल मोनू और देवेंद्र को गिरफ्तार किया था। शेरा के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। शेरा के भाई शमशेर ने 15 दिसंबर 2014 को विजिलेंस में शिकायत दी थी कि सीआईए-थ्री में तैनात एएसआई संजीव ने उसे डराया धमकाया था कि अगर उसने पैसे नहीं दिए तो उसके भाई के खिलाफ संगीन धाराएं लगाएगा। गांव सिसाना वर्तमान में शंकर गार्डन बहादुरगढ़ निवासी दोस्त मनोज ने उससे कहा कि वह सीआईए-वन में बतौर एएसआई तैनात अपने चचेरे भाई सतीश के जरिये बात कराएगा। आरोप था कि एएसआई संजीव ने एएसआई सतीश के जरिये शेरा के केस को कमजोर करने की एवज में 5 लाख मांगे और तीन लाख में सौदा हुआ।

झूठे मामलों पर कोर्ट सख्त

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