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जज ने स्टाफ को भेजकर सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर को बुलाया कोर्ट में

5 वर्ष पहले
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}प्राइवेट बुक्स में ज्यादा मुनाफा

}प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें हैं महंगी

गौरव भाटिया | चंडीगढ़ b.gaurav@dbcorp.in

शहर के ज्यादातर प्राइवेट स्कूलों में एनसीईआरटी की कम कीमत की बुक्स पढ़ाने की बजाए प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी बुक्स पढ़ाने के विरोध में दाखिल याचिका पर वीरवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया। बुधवार को केस की सुनवाई में लगातार दूसरी बार चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से कोई पेश नहीं हुआ तो जस्टिस जीएस संधावालिया ने अपने स्टाफ को भेजकर यूटी के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुवीर सहगल को पेश होने के लिए कहा। कुछ ही समय बाद सुवीर आए, लेकिन कहा कि वह इस बारे में कुछ नहीं जानते इसलिए थोड़ा समय दिया जाए। आगामी एकेडेमिक सेशन को देखते हुए जस्टिस संधावालिया ने सर्दियों की छुटिट्यों के तुरंत बाद 10 जनवरी को मामले की अगली सुनवाई तय कर दी।

लापरवाहचंडीगढ़ प्रशासन: चंडीगढ़पेरेंट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट नितिन गोयल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि तय कानून के अनुसार स्कूलों में वही बुक्स पढ़ाई जा सकती हैं, जिनकी अप्रूवल एजुकेशन डिपार्टमेंट दे। बावजूद इसके स्टूडेंट्स को एनसीईआरटी की बजाए प्राइवेट पब्लिशर्स की महंगी बुक्स खरीदने के लिए दबाव बनाया जाता है और यूटी एजुकेशन डिपार्टमेंट अपनी पावर्स का इस्तेमाल ही नहीं कर रहा। नितिन ने कहा कि सुनवाई के दौरान जब चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से सुनवाई में कोई नहीं आया तो उन्होंने जस्टिस संधावालिया से गुजारिश कर कहा कि ऐसा दूसरी बार हुआ है और अब नए सेशन के शुरू होने में समय कम रह गया है। इस पर जस्टिस संधावालिया ने अपने स्टाफ को भेजकर सुवीर सहगल को बुलवाया। वह करीब 10 मिनट के बाद कोर्ट में पेश हुए लेकिन समय मांग लिया। नितिन ने कहा कि उन्होंने कोर्ट से गुजारिश कि की अब समय कम रह गया है इस पर कोर्ट ने सर्दियों की छुटिट्यों के तुरंत बाद मामले की सुनवाई की तारीख तय कर दी।

शहर के तकरीबन सभी प्राइवेट स्कूलों में प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक्स लगाई जाती हैं। इन क्लासेज के लिए एनसीईआरटी की कोई भी किताब 50 रुपए से ज्यादा नहीं है और उस किताब को बेचने पर मात्र 5 से 7 परसेंट का मुनाफा दुकानदार को मिलता है जबकि प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक्स बेचने पर 30 से 50 परसेंट तक का मुनाफा दुकानदार स्कूल को जाता है।

प्राइवेट पब्लिशर्स की बुक्स की कीमत एनसीईआरटी की बुक्स के मुकाबले कहीं ज्यादा है। यह सारा खेल प्राइवेट स्कूल और बुक्स बेचने वालों की मिलीभगत से चल रहा है। पंजाब एजुकेशन कोड चंडीगढ़ पर लागू होता है। इसके तहत स्कूलों को मान्यता प्रदान करने के साथ ही यह भी तय किया गया कि यह सभी स्कूल वही बुक्स पढ़ाएंगे जिन्हें एजुकेशन डिपार्टमेंट रिकमेंड करेगा। इस कानून के बावजूद चंडीगढ़ एजुकेशन डिपार्टमेंट स्कूलों को एनसीईआरटी की बुक्स पढ़ाने के निर्देश नहीं दे रहा है।

सर्दियों की छुटि्टयों के बाद 10 जनवरी को होगी सुनवाई

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