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गोल्फ क्लब ने कहा कमर्शियल एक्टिविटी नहीं है क्लब में

5 वर्ष पहले
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गोल्फक्लब मैनेजमेंट ने क्लब से वसूले जाने वाली लीज मनी पर सवाल खड़ा कर दिया है। गोल्फ क्लब का कहना है कि उसके पास उपलब्ध अधिकांश जमीन ग्रीन बेल्ट एरिया है। इसे ग्रीन कवर ही रखा जा सकता है। यहां कोई रिहायशी और कमर्शियल बिल्डिंग नहीं बनाई जा सकती। प्रशासन शहर में कई गार्डन के ग्रीन कवर की मेंटेनेंस के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है जबकि गोल्फ क्लब के पास मौजूर ग्रीन कवर पर क्लब हर साल डेढ़ करोड़ रुपए खर्च कर रहा है। ऐसे में उससे लीज रेंट के रूप में करोड़ों रुपए नहीं लिए जा सकते। गोल्फ क्लब प्रशासन और हाईकोर्ट में अपने केस में यही दलील देने जा रहा है।

गोल्फ क्लब मैनेजमेंट का जवाब है कि क्लब ने ग्रीन एरिया पर हजारों पेड़ लगाए है। यहां तक की संसदीय समिति ने भी गोल्फ क्लब के इस माॅडल को देश के अन्य शहरों में अपनाने की बात कही है। गोल्फ क्लब का कहना है कि केवल उससे ही मार्केट के हिसाब से लीज रेंट क्यों। शहर में बने भवनों और अन्य संस्थाओं से भी सीपीडब्लयूडी फार्मूले के अनुसार लीज रेंट लिया जाए। क्लब अपना यही सवाल कोर्ट में भी उठाने जा रहा है।

क्लब का कहना है कि चंडीगढ़ लीज रूल्स में हर साल लीज मनी बढ़ाने का प्रावधान ही नहीं है। लीज रूल्स में 33 साल बाद लीज मनी को बढ़ाया जा सकता है। शहर में सभी संस्थाओं और भवनों को लीज पर जमीन दी गई है। इन सभी की लीज मनी में वृद्धि 33 साल बाद ही की जा सकती है। गोल्फ क्लब की इस दलील के बार प्रशासन अपनी ही कार्रवाई में फंस गया है। गोल्फ क्लब ने सीएलटीए के रेंट पर भी सवाल उठाया है। सीएलटीए से प्रशासन मात्र सौ रुपये सालाना ले रहा है। गोल्फ क्लब का कहना है कि प्रशासन को सभी के साथ एक जैसा फाॅर्मूला अपनाना चाहिए। गोल्फ क्लब को प्रशासन ने सीपीडब्लयूडी फार्मूले के अनुसार रेंट का नोटिस दिया हुआ है। गोल्फ क्लब ने सीएलटीए और लेक क्लब से भी सीपीडब्लयूडी फाॅर्मूले के अनुसार रेंट लेने को कहा है।

सिर्फमेंबरशिप फीस और डोनेशन से ही आय

गोल्फक्लब प्रेसिडेंट बीएस गिल के अनुसार क्लब के पास कोई उसके पास कोई कमर्शियल आय नहीं है। क्लब केवल मैंबरशिप फीस और डोनेशन से चल रहा है। क्लब एक सोसाइटी है। प्रशासन के लीज मनी बढ़ाने का सीधा सीधा असर क्लब मैंबर्स की फीस पर पड़ेगा।

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