िबल्डर्स ने की कमीशन में अपील-मामले आर्बिट्रेशन में भेजे जाएं
कंज्यूमरकोर्ट से लगातार मार झेल रहे डेवलपर अब कंज्यूमर कोर्ट के दायरे से बचने की कोशिश कर रहे हैं। दिसंबर 2015 में पारित नये आर्बिट्रेशन का हवाला देते हुए यूटी स्टेट कमीशन में अर्जियां दायर की हैं, जिसमें उन्होंने सभी मामलों को आर्बिट्रेशन में भेजने की मांग की है। आर्बिट्रेशन एक्ट की धारा-8 का हवाला देते हुए बिल्डरों ने कहा है कि बायर्स एग्रीमेंट के आर्बिट्रेशन क्लॉज के अनुसार ऐसे सभी मामले केवल आर्बिट्रेशन से डिसाइड हो सकते हैं। एग्रीमेंट के इस क्लॉज पर खरीदार भी अपने हस्ताक्षर करे हैं। इसलिए वह इसमें बाध्य है। बिल्डरों ने कहा कि उपभोक्ता को मामले सुलझाने के लिए आर्बिट्रेशन का जरिया मिला हुआ है। इसलिए वह कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा नहीं खटखटा सकते। बिल्डर्स जैसे यूनिटेक, एमआरएमजीएफ और प्यूमा रिएल्टर शामिल हैं। ऐसी अर्जियां करीब 40 मामलों में दायर की हैं। उपभोक्ता की तरफ से पेश हो रहे एडवोकेट संदीप भारद्वाज और पंकज चांदगोठिया ने इसकी अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 3 में यह साफ लिखा है कि उपभोक्ता अदालत एक अतिरिक्त जरिया है, जिससे उपभोक्ता अपनी शिकायत का निवारण कर सकता है। वहीं चंडीगढ़ स्टेट कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस जसबीर सिंह ने सभी दलीलों को सुनकर मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है जो दस दिन के भीतर आने की उम्मीद है।