को-ऑपरेटिव मॉडल पर काम करता है यह कॉरपोरेट गांव
चंडीगढ़। होशियारपुरके गांव लांबड़ां कांगड़ी की सोसायटी के प्रोजेक्ट मैनेजर जसविंदर सिंह ने बताया कि नया ट्रैक्टर खरीदकर उसके पीछे तीन अलग-अलग टैंकर बनाए हैं, जिनमें से दो टैंकर में गोबर इकट्ठा किया जाएगा। किस गांववाले ने कितना गोबर दिया, वहीं तोलकर रिकाॅर्ड में लिखा जाएगा। तीसरे में घर का कूड़ा-कर्कट इकट्ठा किया जाएगा। उन्होंने बताया, अभी ये पायलट प्रोजेक्ट है। हम 30 घरों से इसे शुरू करेंगे। कामयाबी मिलने के बाद बढ़ाया जाएगा। लोगों को पराली जलाने से रोकेंगे और खुद पराली से बिजली तैयार करने पर काम करेंगे।
सोसायटी के सेक्रेटरी चंद्र देव बताते हैं, हमारे पास 1768 मेंबर हंै जिनका 20 करोड़ रुपए हमारे पास जमा है। अपने कामों से सोसायटी को जो लाभ होता है हम हर साल उसका बीस फीसदी इन्हीं मेंबर्स को डिविडेंट के रूप में भी देते हैं। सोसायटी का अपना फंड 4 करोड़ से ज्यादा है। हमने कोई लोन नहीं लिया हुआ बल्कि बीस करोड़ रुपए सरकार के बैंकों में जमा करवाया हुआ है।
हर साल 50 लड़कियों को मुफ्त प्रोफेशनल ट्रेनिंग
लड़कियोंको अपने पैर पर खड़ा करने के लिए सोसायटी हर साल 50 लड़कियों को कंप्यूटर और ब्यूटीशियन के कोर्स कराती है। उसके बाद काम जमाने के लिए लोन भी देती है।
दूसरेबैंकों से लोन भी नहीं लेते गांव के लोग
क्योंकि,इनका अपना बैंक है, इसलिए गांव वाले किसी भी तरह का लोन अपने ही को-आॅपरेटिव बैंक से लेते हैं। इसलिए बैंक को होने वाला फायदा भी अपने पास ही रहता है।
गोबर गैस प्लांटसे गांव के स्कूल तक अंडर ग्राउंड पाइपलाइन बिछाई जा चुकी है। साथ ही जो गोबर देगा, उसे बदले में खाद देंगे। गलियों में सीसीटीवी कैमरे लग रहे हैं ताकि सुरक्षा के साथ पाइपलाइन पर नजर रखी जा सके। गांव ने सबसे पहले ट्रांसपोर्ट शुरू किया था। 6 टैंपू खरीदकर गांव से शहर तक सवारियां पहुंचानी शुरू कीं। उसके बाद एग्रो सर्विस सेंटर खोलकर छोटे किसानों को आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाईं। फिर डीजल पंप ले लिया।
टैंकर कोदो भागों में बांटा गया। एक में लोहा, कांच या और धातुओं का सामान होगा दूसरे में सब्जियों के छिलके ,कागज दूसरे प्रकार का। जब इसे प्लांट में डालकर गैस बना ली जाएगी तो यही खाद बन जाएगी। हम वापस उन्हीं लोगों को उतनी उतनी खाद दे देंगे। इससे उन्हें दोहरा फायदा होगा। वे अपने खेतों के लिए रासायनिक खादों के खर्च से बच जाएंगे और साथ ही उन्हें गोबर को ठिकाने लगाने के झंझट से मुक्ति मिलेगी।