इंटरनेट से सीखा गोल्फ, अब इंटरनेशनल रेफरी
मंजूजाखड़ ने पिछले हफ्ते होम ऑफ गोल्फ कहे जाने वाले स्कॉटलैंड के टूर्नामेंट एडमिनिस्ट्रेटर एंड रूल्स स्कूल में इंटरनेशनल रेफरी की एग्जाम पास किया है। यहां दुनिया के 50 देशों के 86 पार्टिसिपेंट्स में मंजू सबसे कम उम्र की थीं। यहां तक पहुंचने वाले अपने देशों के बेस्ट प्लेयर होते हैं। और हर एक के पास 25-30 साल का एक्सपीरियंस होता है। यही वजह थी कि पार्टिसिपेंट्स में ज्यादातर 60 प्लस एज ग्रुप के थे। मंजू कहती हैं ‘उन्होंने इस एग्जाम के लिए तीन महीने 14-14 घंटे पढ़ाई की थी। इतनी मेहनत तो कभी स्कूल या कॉलेज की पढ़ाई के लिए भी नहीं की। राजस्थान के झुंझुनू की रहने वाली मंजू बास्केटबॉल की नेशनल प्लेयर रह चुकी हैं। उन्होंने कहा, ‘शादी के सालों बाद जब अपने स्पोर्ट्स करिअर की सेकंड इंनिंग की शुरुआत करने की सोची तो दो ऑप्शन थे। बास्केटबॉल और टेनिस। बास्केटबॉल में टीम की जरूरत होती है और टेनिस में भी एक पार्टनर चाहिए था। तो मैंने अकेले प्रैक्टिस वाले गोल्फ को चुना। दूसरी चुनौती यह थी की पति सेना में हैं और पोस्टिंग के चलते उन्हें शहर बदलना पड़ता था। इसलिए उन्हें गोल्फ कोर्स जरूर मिल जाता था।’ जब पहली बार गोल्फ स्टिक उठाई तो ज्योति रंधावा ने कोचिंग दी। उस समय 34 साल की थी। दोस्त और गोल्फ कोर्स के मैनेजर कहते थे-मैडम सोशल गोल्फिंग चलेगा। प्रोफेशनल इस उम्र में नहीं हो पाएगा। मंजू कहती हैं, ‘मैंने ठान लिया, कैसे नहीं होगा। जिस बार विनर बनती तो नोटिस बोर्ड पर अपना रिजल्ट चिपका देती और सबको बताती। देखो मैं इस उम्र में भी जीत सकती हूं। सुबह 8-12 बजे तक जब बच्चे स्कूल जाते तो मैं प्रैक्टिस के लिए निकल जाती। रेफरी रूलिंग्स की वजह से पेनल्टी दी जाती थी। मुझे रूल्स पता नहीं थे। कई बार जीत जाती अचानक रूल्स की वजह से पेनल्टी लग जाती। चंडीगढ़ में एक ऐसा ही गेम मैं जीत कर भी हार गई। दीपिका पादुकोण की बहन के साथ एक मैच में आखिरी होल तक बराबरी पर थी, फिर एक होल से हार गई। अंबाला में एक रूल्स ऑफिशियल ने मुझे रूल्स सीखने का आइडिया सुझाया। मुझे कोई गुरु नहीं मिला। जो भी सीखा इंटरनेट से। इस साल ओलिंपिक में पहली बार गोल्फ रहा है। यूरोपियन टूर डायरेक्टर ने भी मुझे रेफरी के लिए अप्रोच किया है।’
मंजू बास्केटबॉल की नेशनल प्लेयर रह चुकी हैं