शराब बिक्री पर तमिलनाडु का मॉडल अपना सकता है पंजाब. स्टडी के लिए भेजीं टीमें / शराब बिक्री पर तमिलनाडु का मॉडल अपना सकता है पंजाब. स्टडी के लिए भेजीं टीमें

वैट और सेंट्रल टैक्सस के बाद तीसरा राज्य की आमदनी का स्रोत है जबकि तमिलनाडु को 26130 करोड़ रुपए सालाना आय होती है।

Feb 14, 2017, 04:34 AM IST
Alcohol is on sale in Tamil Nadu state model
चंडीगढ़. पंजाब को शराब के ठेकों को नीलाम करने से पंजाब को 5500 करोड़ रुपए की सालाना आय होती है जो वैट और सेंट्रल टैक्सस के बाद तीसरा राज्य की आमदनी का स्रोत है जबकि तमिलनाडु को 26130 करोड़ रुपए सालाना आय होती है।

आबादी के लिहाज से देखा जाए तो पंजाब की आबादी(2.98 करोड़) तमिलनाडु (7.78 करोड़)से अढ़ाई गुणा कम है लेकिन शराब से आमदनी पांच गुणा कम होती है। आखिर यह गैप इतना ज्यादा क्याें है? फर्क सिर्फ इतना है कि पंजाब में लिकर का बिजनेस प्राइवेट हाथों में है जिसमें कि ज्यादातर पॉलिटिशिंयस इन्वॉल्व हैँ और तमिलनाडु में यह सरकारी हाथों में है। यह गैप कहां और कैसे है? इसी को स्टडी करने के लिए पंजाब के एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग ने तमिलनाडु समेत कुछ राज्यों में अपनी टीमें भेजी हैं जो अगले दस दिन में रिपोर्ट तैयार करके विभाग को सौंपेंगी। 24 और 25 फरवरी को सभी की प्रेसेनटेंशन देखकर पंजाब अपनी नई आबकारी नीति तय करेगा। एक्साइज एंड टैक्सेशन विभाग के एडिश्नल चीफ सेक्रेटरी सतीश चंद्रा ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में शराब बेचने का सारा सिस्टम सरकार के अधीन काम करने वाली कार्पोरेशन के पास है, यहां तक कि ठेके भी सरकार के हैं जबकि पंजाब में शराब बनाने वाली कंपनियां सुपर होलसेलर जिसे एल वन कहा जाता है को शराब देती हैं और उसके बाद यह एल टू से होते हुए रिटेलर के पास जाती है।

यानी प्रॉफिट तीन स्थानों पर बंटता है। क्या यह सरकार के अधीन एक कार्पोरेशन बनाकर लेना संभव है? या इसमें और क्या क्या दिक्कतें आ सकती हैं ? कितनी मैनपावर चाहिए? क्या पॉलिसी में कुछ परिवर्तन करने की जरूरत होगी कि नहीं? इसी को स्टडी करने के लिए टीमों को विभिन्न राज्यों जहां एक्साइज से इनकम पंजाब से ज्यादा है में भेजा जा रहा है।
आप और कांग्रेस भी तमिलनाडु मॉडल को लागू करने के पक्ष में
4 फरवरी को संपन्न हुए विधानसभा के चुनाव में प्रचार के दौरान आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तमिलनाडु माॅडल लागू करने पर विचार करने का वादा किया है। दरअसल पंजाब में लिकर के धंधा पालिटिंशियंस के हाथाें में ही ज्यादा है। यहां तक कि कई बड़े नेताओं ने तो अपनी शराब की फैक्ट्रियां भी लगाई हुई हैं तो कइयों के ठेके हैं। अरविंद केजरीवाल तो क्योंकि नए हैं उनके लिए यह गलबा तोड़ना आसान होगा लेकिन क्या कैप्टन ऐसा कर पाएंगे?
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