नुक्कड़ ढाबे के मालिक की बेटी की मौत में तीनों दोस्त दोषी करार

5 वर्ष पहले
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चंडीगढ़ । नशे की ओवरडोज के कारण नुक्कड़ ढाबे के मालिक की बेटी मनीषा की गैर-इरादतन हत्या के मामले में सोमवार को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एवं सेशंस जज अंशु शुक्ला की अदालत ने तीन आरोपी दिलप्रीत सिंह, कमल सिंह और रजत बेनीवाल को दोषी करार दे दिया। 3 साल पुराने इस चर्चित मामले में अदालत ने दिलप्रीत सिंह, कमल सिंह और रजत बेनीवाल को गैर-इरादतन हत्या, सामूहिक दुष्कर्म, अननेचुरल सेक्स अपहरण की धाराओं के तहत दोषी करार दिया। सजा पर फैसला 3 फरवरी को होगा। 

शुरू में गैर-इरादतन हत्या, अपहरण साक्ष्य मिटाए जाने और आपराधिक साजिश रचने जाने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। लेकिन बाद में अदालत में पेश सीएफएसएल रिपोर्ट के आधार पर गैंगरेप और अननेचुरल सेक्स की अतिरिक्त धाराओं के तहत फिर से आरोप तय किए गए। 

कॉल डिटेल से हुआ था मामले का खुलासा: 19 अक्टूबर 2014 को मनीषा का शव राजपुरा के नजदीक शंभू बैरियर के साथ लगते नाले में मिला था। युवती सेक्टर-34 के इंस्टीट्यूट से आर्किटेक्चर का कोर्स कर रही थी। वह रोजाना की तरह इंस्टीट्यूट गई थी। लेकिन वापस नहीं लौटी। पुलिस ने फोन सर्विलेंस पर लगाया। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल खंगाली तो खुलासा हुआ कि आखिरी बार उसका रजत के साथ संपर्क हुआ था। पुलिस ने रजत को उसके घर से गिरफ्तार किया था। रजत ने बताया कि नशे की ओवरडोज की वजह से युवती की मौत हो गई। डर के कारण उसने उसका शव नाले में फेंका था।
 
ड्रग्स ली, फिर शराब पी
रजत ने बयानों में बताया था कि वह 18 अक्टूबर को कार में सभी इकट्ठे गए थे और सबसे पहले वे एक पार्टी में गए, जहां सब ने ड्रग्स ली और शराब पी। मनीषा बेहोश हो गई और उसकी मौत हो गई। जैसे ही तीनों को पता चला कि युवती की मौत हो चुकी है तो सभी मिलकर गाड़ी में पहले पलसौरा, फिर मोहाली और फिर वह राजपुरा रोड के शंभू बैरियर के नाले के नजदीक पहुंचे। जहां उन्होंने मनीषा को एक कपड़े में लपेटकर फेंक दिया। 
 
टाइम लाइन
-    18 अक्टूबर 2014: युवती घर से गायब हुई
-    19 अक्टूबर: केस दर्ज किया गया
-    8 जनवरी 2015  : मामले में पुलिस ने चार्जशीट दायर की थी। 
-    4 फरवरी 2015: मामले में आरोप तय हुए थे
-    1 अप्रैल 2015: मामले में सीएफएसएल रिपोर्ट पेश
-    5 दिसंबर 2015: मामले में गैंगरेप और अननेचुरल सेक्स की अतिरिक्त धाराओं के तहत आरोप तय किए गए।
 
एक पिता का सभी के लिए मैसेज: बच्चों पर नजर रखकर दोस्तों की तरह समझाएं
जवान औलाद की मौत के बाद मां-बाप पर क्या बीतती है, ये वही समझ सकते हैं। मेरी बेटी के हत्यारों को कानून कड़ी से कड़ी सजा दे। मैं खुद हमारी बेटी को छीनने वालों को कड़ी सजा दिलाने के लिए लडूंगा। क्योंकि बहकावा देने वालों ने मेरी बेटी के सपने पूरा होने से पहले ही तोड़ दिए। बेटी 12वीं पास करने के बाद फैशन डिजाइनिंग का कोर्स कर रही थी। पढ़ने-लिखने में होशियार थी और हमेशा सिविल सर्विसिस में जाना चाहती थी।  बेटी ने कभी कोई ऐसा काम नहीं किया था, जिससे हमारा सिर झुके। न ही कभी उसके पहले कोई शिकायत आई। लेकिन कमल ने मेरी बेटी को बहकाया और उसे जबरन नशा दिया, क्योंकि मनीषा कभी नशा नहीं करती था।
 
मेरी लाडली की कमी कोई पूरी नहीं कर सकता। कोर्ट पर पूरा भरोसा है कि मुझे न्याय मिलेगा। मैं चाहता हूं कि मेरी बेटी के हत्यारों को कड़ी सजा मिले। क्योंकि इन लोगों ने मेरी बेटी की जान लेने से पहले उसके सपनों और भविष्य को भी खत्म कर दिया। धोखे से मेरी बेटी को नशा दिया गया और जब उसकी तबीयत खराब हुई तो अपनी करतूत छिपाने के लिए मासूम बेटी को बेरहमी से मारकर फेंक दिया। अब मैं दर्द झेल रहा हूं, लेकिन सभी पेरेंट्स को इतना जरूर कहना चाहता हूं कि अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा दें। किसी भी तरह के बहकावे में अाने से बचाने के लिए बच्चों पर नजर रखें। अगर उनकी आदतों या बर्ताव में कुछ बदलाव नजर आए तो बच्चों को एक दोस्त की तरह समझाकर किसी के बहकावे में आने से रोकें। ताकि जो दुख मैंने झेला है वो किसी और को न झेलना पड़े। क्योंकि मेरी बेटी को बहकाने जैसे वाले लोग अभी भी हमारे आसपास ही हैं।
-जोगिंदर सिंह, मनीषा के पिता और नुक्कड़ ढाबे के मालिक
 
 
रौंगटे खड़े हो गए जब शव को देखा था
जोगिंदर सिंह का कहना है कि उस दिन को याद करके आज भी सहम जाता हूं। बेटी के लापता होने पर शिकायत पुलिस को दी। पुलिस ने जांच शुरू की और लड़कों के पकड़े जाने के बाद जब शव को देखा तो मेरे रौंगटे खड़े हो गए। ये कोई नहीं समझ सकता कि मैंने उन दिनों को कैसे बिताया। एक बाप के लिए जवान बेटी को इस तरह खोने की पीड़ा जिंदगी भर सताती रहेगी।
 
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